5 काहैकि जो लोग सारीरिक होथैं बे सरीर की बातन मैं मन लगाथैं; जो लोग आत्मा के रूप मैं जीथैं उनकै, आत्मा जो चाहथै बहे के जरिया अपने मन कै नियंतरित करो जाथै। 6 सरीर मैं मन लगानो तौ मौत है, लेकिन पवित्र आत्मा मैं मन लगानो जिंदगी और सांति है। 7 और सरीर मैं मन लगानो तौ परमेस्वर से दुस्मनी रखनो है, काहैकि ना तौ हम परमेस्वर के नियम के भरोसे है और ना हुई सकथै; 8 और जो सरीर के प्रकृति के वस मैं है, बे परमेस्वर कै खुस नाय कर सकथैं।
Publicidade
Publicidade