बिस्वास और बुद्धि
2 मेरे भईय्यौ, जब तुम अलग-अलग परिक्छा मैं पड़ौ तौ जाकै भौत खुसी कि बात समझौ, 3 जौ जानकै कि तुमरे बिस्वास के परखे जान से तुमरो बिस्वास पैदा होथै, तौ नतीजा स्वरूप तुमकै सहन की छमता मिलथै। 4 सुनिस्चित करैं कि तुमरो धीरज बिना कोई असफलता के तुमकै हर तरह से आखरी ले लै जाथै, ताकी तुम सिद्ध और पूरे हुई जाबौ और तुम मैं कोई बात की कमी ना रहबै।
22 लेकिन बचन मैं चलन बारे बनौ, खाली सुनन बारे नाय जो अपनिए आपकै धोका देथैं। 23 काहैकि जो बचन कै सुनन बारो होबै, बामै चलन बारो नाय, तौ बौ बौ आदमी के हानी है जो अपनो मोहों दरपन मैं देखथै। 24 काहैकि बौ अपने आपकै देखकै चलो जाथै, और तुरंत भूल जाथै कि बौ कैसो रहै। 25 पर अगर तुम बौ सिद्ध नियम कै ध्यान से देखैगे जो लोगन कै आजाद करथै, और बाके ऊपर ध्यान देत रहथौ और ना खाली सुनथौ और फिर जाकै भूल जाथौ, बल्कि जाकै व्यवहार मैं लाथौ, तौ तुम जो करथौ बामै धन्य हुईकै परमेस्वर को आर्सिवाद पाबैगे।