बिस्वास और बुद्धि
2 मेरे भईय्यौ, जब तुम अलग-अलग परिक्छा मैं पड़ौ तौ जाकै भौत खुसी कि बात समझौ, 3 जौ जानकै कि तुमरे बिस्वास के परखे जान से तुमरो बिस्वास पैदा होथै, तौ नतीजा स्वरूप तुमकै सहन की छमता मिलथै। 4 सुनिस्चित करैं कि तुमरो धीरज बिना कोई असफलता के तुमकै हर तरह से आखरी ले लै जाथै, ताकी तुम सिद्ध और पूरे हुई जाबौ और तुम मैं कोई बात की कमी ना रहबै। 5 लेकिन अगर तुम मैं से कोई कै बुद्धि कि कमी होबै तौ परमेस्वर से प्रार्थना करै, तौ बौ तुमकै देगो; काहैकि परमेस्वर सबन कै उदारता और प्रेम से देथै।