2 काहैकि आपन बड़ा जोड़ बार चूक जाथैं जो कोई बचन मैं नाय चूकथै, बहे तौ सिद्ध आदमी है; और पूरे सरीर मैं भी लगाम लगाए सकथै। 3 जब आपन अपने वस मैं करन के ताहीं घोड़न के मोहों मैं लगाम लगाथैं, तौ आपन बाकै पूरे भरोसा से बाके सरीर कै भी फेर सकथैं। 4 देखौ, जहाज भी, कितने बड़े होथैं, और तेज ब्यार से चलाय जाथैं, तौभी एक छोटी सी पतवार से माँझी कि इच्छा से घुमाए जाथैं। 5 बैसिये जीभ भी छोटो सो अंग है और बड़ी-बड़ी डींग मारथै; देखो कैसे, थोड़ी सी आगी से कितने बड़े-बड़े बन मैं आगी लग जाथै। 6 जीभ एक आगी है; जीभ हमरे अंगन मैं एक अधर्म की एक दुनिया है और पूरे सरीर मैं कलंक लगाथै, और भवचक्र मैं आगी लगाए देथै और नरक कुंड की आगी से जलत रहथै। 8 लेकिन जीभ कै आदमी मैं से कोई वस मैं नाय कर सकथै; बौ एक ऐसी बला है जो कभी रुकतै नाय; बौ नासवान विस से भरी पड़ी है। 9 जहे से हम प्रभु और दऊवा को धन्यवाद देन ताहीं करथैं और जहे से दुसरे लोगन कै आसीस की जघा स्राप देन के ताहीं करथैं, जो परमेस्वर के तराहनी बनाये गै हैं। 10 एकै मोहों से आर्सिवाद और स्राप दोनों निकरथैं। मेरे भईय्यौ और बहेनियौ, ऐसो नाय होनो चाहिए।
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