5 बैसिये जीभ भी छोटो सो अंग है और बड़ी-बड़ी डींग मारथै; देखो कैसे, थोड़ी सी आगी से कितने बड़े-बड़े बन मैं आगी लग जाथै। 6 जीभ एक आगी है; जीभ हमरे अंगन मैं एक अधर्म की एक दुनिया है और पूरे सरीर मैं कलंक लगाथै, और भवचक्र मैं आगी लगाए देथै और नरक कुंड की आगी से जलत रहथै।
17 पर जो बुद्धि ऊपर से आथै बौ सबसे पहले सुद्ध होथै; फिर मिलनसार, कोमल, और मीठो स्वभाव और दया, और अच्छे फलन से लदे भै और पक्छपात और कपटरहित होथै।