9 जहे से हम प्रभु और दऊवा को धन्यवाद देन ताहीं करथैं और जहे से दुसरे लोगन कै आसीस की जघा स्राप देन के ताहीं करथैं, जो परमेस्वर के तराहनी बनाये गै हैं। 10 एकै मोहों से आर्सिवाद और स्राप दोनों निकरथैं। मेरे भईय्यौ और बहेनियौ, ऐसो नाय होनो चाहिए। 11 का सोता के एकै मोहों से मीठो और खारो दोनों पानी निकरथैं? 12 मेरे भईय्यौ और बहेनियौ, का अंजीर के पेंड़ मैं जैतून, या दाखलता मैं अंजीर लग सकथैं? बैसिये खारे सोता से मीठो पानी नाय निकर सकथै।
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