13 तुम जो जौ कहथौ, "आज या कल हम कोई और नगर मैं जाएकै हुँआँ एक साल बितामंगे, और ब्यापार करकै पैसा कमांगे।" 14 और जौ नाय जानथौ कि कल को होगो सुन तौ लेबौ, तुमरी जिंदगी हईये का? तुम तौ मानौ धुंध के हानी हौ, जो थोड़ी देर दिखाई देथै, फिर लोप हुई जाथै। 15 जाके बदले तुमकै कहनो चाहिए, "अगर प्रभु चाही तौ हम जिंदे रहमंगे, और जौ या बौ काम भी करंगे।" 16 पर अब तुम अपनी डींग मारन मैं घमंड करथौ; ऐसो सबै घमंड बुरो होथै। 17 तौ फिर, अगर हम बौ अच्छो ना करते जो हम जानथैं कि हमैं करनो चाहिए, तौ हम पाप के दोसी हैं।