अबाज सिद्धांत
1 लेकिन तैं ऐसी बात सिखा कर जो खरे सिद्धांत से मिलत होबै। 2 बड़े बूढ़े आदमिन कै सयंमी, समझदार और अपने खुद के ऊपर काबू रखन की बात सिखा; ताकी उनको बिस्वास, प्रेम, और धीरज मैं मजबूत होमैं। 3 ऐसिये बुर्जुग बईंय्यरन कै सिखा कि बेऊँ पवित्र जिंदगी जीमैं। बे ना तौ एक दुसरेन की निंदा करन बारी और ना दाखरस की गुलाम होमैं। पर बे अच्छी बात सिखान बारी होमैं, 4 जोसे बे ज्वान बईंय्यरन कै आग्या दियैं कि बे अपने लोगा और बालकन से प्रेम करैं, 5 बे अपने बलबूते खड़ी और सुद्ध, घर को काम-काज करन बारी, भली और अपने लोगा के अधीन रहन बारी होमैं, ताकी कोई भी परमेस्वर के बचन की बुराई ना होबै।
6 ऐसिये ज्वान आदमिन कै समझा, कि बे सयंमी बनै। 7 सब बातन मैं तू खुद भले काम को नमूना बना; तेरे उपदेस मैं गंभीर और इमानदार रहै। 8 ऐसे सब्दन को इस्तमाल करौ जोकी बुराई ना करी जाबै, ताकी हमरे दुस्मन कै हमरी निंदा करन को मौका ना मिलै कि लज्जित होमैं।