6 यह सब कुछ हमारी इबरत के लिए वाक़े हुआ ताकि हम उन लोगों की तरह बुरी चीज़ों की हवस न करें। 7 उनमें से बाज़ की तरह बुतपरस्त न बनें, जैसे मुक़द्दस नविश्तों में लिखा है, "लोग खाने-पीने के लिए बैठ गए और फिर उठकर रंगरलियों में अपने दिल बहलाने लगे।" 8 हम ज़िना भी न करें जैसे उनमें से बाज़ ने किया और नतीजे में एक ही दिन में 23,000 अफ़राद ढेर हो गए। 9 हम ख़ुदावंद की आज़माइश भी न करें जिस तरह उनमें से बाज़ ने की और नतीजे में साँपों से हलाक हुए। 10 और न बुड़बुड़ाएँ जिस तरह उनमें से बाज़ बुड़बुड़ाने लगे और नतीजे में हलाक करनेवाले फ़रिश्ते के हाथों मारे गए।
13 आप सिर्फ़ ऐसी आज़माइशों में पड़े हैं जो इनसान के लिए आम होती हैं। और अल्लाह वफ़ादार है। वह आपको आपकी ताक़त से ज़्यादा आज़माइश में नहीं पड़ने देगा। जब आप आज़माइश में पड़ जाएंगे तो वह उसमें से निकलने की राह भी पैदा कर देगा ताकि आप उसे बरदाश्त कर सकें।