11 इनसान के बातिन से कौन वाक़िफ़ है सिवाए इनसान की रूह के जो उसके अंदर है? इसी तरह अल्लाह से ताल्लुक़ रखनेवाली बातों को कोई नहीं जानता सिवाए अल्लाह के रूह के। 12 और हमें दुनिया की रूह नहीं मिली बल्कि वह रूह जो अल्लाह की तरफ़ से है ताकि हम उस की अताकरदा बातों को जान सकें।
13 यही कुछ हम बयान करते हैं, लेकिन ऐसे अलफ़ाज़ में नहीं जो इनसानी हिकमत से हमें सिखाया गया बल्कि रूहुल-क़ुद्स से। यों हम रूहानी हक़ीक़तों की तशरीह रूहानी लोगों के लिए करते हैं।