9 इसमें अल्लाह की मुहब्बत हमारे दरमियान ज़ाहिर हुई कि उसने अपने इकलौते फ़रज़ंद को दुनिया में भेज दिया ताकि हम उसके ज़रीए जिएँ। 10 यही मुहब्बत है, यह नहीं कि हमने अल्लाह से मुहब्बत की बल्कि यह कि उसने हमसे मुहब्बत करके अपने फ़रज़ंद को भेज दिया ताकि वह हमारे गुनाहों को मिटाने के लिए कफ़्फ़ारा दे।
16 और ख़ुद हमने वह मुहब्बत जान ली है और उस पर ईमान लाए हैं जो अल्लाह हमसे रखता है।
अल्लाह मुहब्बत ही है। जो भी मुहब्बत में क़ायम रहता है वह अल्लाह में रहता है और अल्लाह उसमें।