10 हन्ना शदीद परेशानी के आलम में फूट फूटकर रोने लगी। रब से दुआ करते करते 11 उसने क़सम खाई, "ऐ रब्बुल-अफ़वाज, मेरी बुरी हालत पर नज़र डालकर मुझे याद कर! अपनी ख़ादिमा को मत भूलना बल्कि बेटा अता फ़रमा! अगर तू ऐसा करे तो मैं उसे तुझे वापस कर दूँगी। ऐ रब, उस की पूरी ज़िंदगी तेरे लिए मख़सूस होगी! इसका निशान यह होगा कि उसके बाल कभी नहीं कटवाए जाएंगे।"
27 उस वक़्त मैंने इलतमास की थी कि रब मुझे बेटा अता करे, और रब ने मेरी सुनी है। 28 चुनाँचे अब मैं अपना वादा पूरा करके बेटे को रब को वापस कर देती हूँ। उम्र-भर वह रब के लिए मख़सूस होगा।" तब उसने रब के हुज़ूर सिजदा किया।