10 हन्ना शदीद परेशानी के आलम में फूट फूटकर रोने लगी। रब से दुआ करते करते 11 उसने क़सम खाई, "ऐ रब्बुल-अफ़वाज, मेरी बुरी हालत पर नज़र डालकर मुझे याद कर! अपनी ख़ादिमा को मत भूलना बल्कि बेटा अता फ़रमा! अगर तू ऐसा करे तो मैं उसे तुझे वापस कर दूँगी। ऐ रब, उस की पूरी ज़िंदगी तेरे लिए मख़सूस होगी! इसका निशान यह होगा कि उसके बाल कभी नहीं कटवाए जाएंगे।"
12 हन्ना बड़ी देर तक यों दुआ करती रही। एली उसके मुँह पर ग़ौर करने लगा 13 तो देखा कि हन्ना के होंट तो हिल रहे हैं लेकिन आवाज़ सुनाई नहीं दे रही, क्योंकि हन्ना दिल ही दिल में दुआ कर रही थी। लेकिन एली को ऐसा लग रहा था कि वह नशे में धुत है, 14 इसलिए उसने उसे झिड़कते हुए कहा, "तू कब तक नशे में धुत रहेगी? मै पीने से बाज़ आ!"
15 हन्ना ने जवाब दिया, "मेरे आक़ा, ऐसी कोई बात नहीं है। मैंने न मै, न कोई और नशा-आवर चीज़ चखी है। बात यह है कि मैं बड़ी रंजीदा हूँ, इसलिए रब के हुज़ूर अपने दिल की आहो-ज़ारी उंडेल दी है। लफ़्ज़ी तरजुमा : अपनी जान उंडेल दी है। 16 यह न समझें कि मैं निकम्मी औरत हूँ, बल्कि मैं बड़े ग़म और अज़ियत में दुआ कर रही थी।"
17 यह सुनकर एली ने जवाब दिया, "सलामती से अपने घर चली जा! इसराईल का ख़ुदा तेरी दरख़ास्त पूरी करे।" 18 हन्ना ने कहा, "अपनी ख़ादिमा पर आपकी नज़रे-करम हो।" फिर उसने जाकर कुछ खाया, और उसका चेहरा उदास न रहा।
समुएल की पैदाइश और बचपन
19 अगले दिन पूरा ख़ानदान सुबह-सवेरे उठा। उन्होंने मक़दिस में जाकर रब की परस्तिश की, फिर रामा वापस चले गए जहाँ उनका घर था। और रब ने हन्ना को याद करके उस की दुआ सुनी। 20 इलक़ाना और हन्ना के बेटा पैदा हुआ। हन्ना ने उसका नाम समुएल यानी ‘उसका नाम अल्लाह है’ रखा, क्योंकि उसने कहा, "मैंने उसे रब से माँगा।"
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