ख़ुदा की जमात के निगरान
1 यह बात यक़ीनी है कि जो जमात का निगरान बनना चाहता है वह एक अच्छी ज़िम्मादारी की आरज़ू रखता है। 2 लाज़िम है कि निगरान बेइलज़ाम हो। उस की एक ही बीवी हो। वह होशमंद, समझदार, यूनानी लफ़्ज़ में ज़ब्ते-नफ़स का उनसुर भी पाया जाता है। शरीफ़, मेहमान-नवाज़ और तालीम देने के क़ाबिल हो। 3 वह शराबी न हो, न लड़ाका बल्कि नरमदिल और अमनपसंद। वह पैसों का लालच करनेवाला न हो। 4 लाज़िम है कि वह अपने ख़ानदान को अच्छी तरह सँभाल सके और कि उसके बच्चे शराफ़त के साथ उस की बात मानें। 5 क्योंकि अगर वह अपना ख़ानदान न सँभाल सके तो वह किस तरह अल्लाह की जमात की देख-भाल कर सकेगा? 6 वह नौमुरीद न हो वरना ख़तरा है कि वह फूलकर इबलीस के जाल में उलझ जाए और यों उस की अदालत की जाए। 7 लाज़िम है कि जमात से बाहर के लोग उस की अच्छी गवाही दे सकें, ऐसा न हो कि वह बदनाम होकर इबलीस के फंदे में फँस जाए।
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