17 जो बुज़ुर्ग जमात को अच्छी तरह सँभालते हैं उन्हें दुगनी इज़्ज़त के लायक़ समझा जाए।यहाँ मतलब है कि उनकी इज़्ज़त ख़ासकर माली लिहाज़ से की जाए। मैं ख़ासकर उनकी बात कर रहा हूँ जो पाक कलाम सुनाने और तालीम देने में मेहनत-मशक़्क़त करते हैं। 18 क्योंकि कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है, "जब तू फ़सल गाहने के लिए उस पर बैल चलने देता है तो उसका मुँह बाँधकर न रखना।" यह भी लिखा है, "मज़दूर अपनी मज़दूरी का हक़दार है।"
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