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Resultados da busca por "esperança"

14 resultados encontrados

  1. Romanos 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 2–5 de 21

    2हमारे ईमान लाने पर उसने हमें फ़ज़ल के उस मक़ाम तक पहुँचाया जहाँ हम आज क़ायम हैं। और यों हम इस उम्मीद पर फ़ख़र करते हैं कि हम अल्लाह के जलाल में शरीक होंगे।

    4साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।

    5और उम्मीद हमें शरमिंदा होने नहीं देती, क्योंकि अल्लाह ने हमें रूहुल-क़ुद्स देकर उसके वसीले से हमारे दिलों में अपनी मुहब्बत उंडेली है।

  2. 1 Coríntios 13

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 4–13 de 13

    4मुहब्बत सब्र से काम लेती है, मुहब्बत मेहरबान है। न यह हसद करती है न डींगें मारती है। यह फूलती भी नहीं।

    7यह हमेशा दूसरों की कमज़ोरियाँ बरदाश्त करती है, हमेशा एतमाद करती है, हमेशा उम्मीद रखती है, हमेशा साबितक़दम रहती है।

    13ग़रज़ ईमान, उम्मीद और मुहब्बत तीनों क़ायम रहते हैं, लेकिन इनमें अफ़ज़ल मुहब्बत है।

  3. Romanos 12

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 12
    Mostrando versículos 10–16 de 21

    10आपकी एक दूसरे के लिए बरादराना मुहब्बत सरगरम हो। एक दूसरे की इज़्ज़त करने में आप ख़ुद पहला क़दम उठाएँ।

    12उम्मीद में ख़ुश, मुसीबत में साबितक़दम और दुआ में लगे रहें।

    16एक दूसरे के साथ अच्छे ताल्लुक़ात रखें। ऊँची सोच न रखें बल्कि दबे हुओं से रिफ़ाक़त रखें। अपने आपको दाना मत समझें।

  4. 1 Crônicas 25

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 25
    Mostrando versículos 18–28 de 31

    1811. अज़रेल,

    2417. यसबिक़ाशा,

    2821. हौतीर,

  5. Hebreus 6

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 6
    Mostrando versículos 15–19 de 20

    15इस पर इब्राहीम ने सब्र से इंतज़ार करके वह कुछ पाया जिसका वादा किया गया था।

    18ग़रज़, यह दो बातें क़ायम रही हैं, अल्लाह का वादा और उस की क़सम। वह इन्हें न तो बदल सकता न इनके बारे में झूट बोल सकता है। यों हम जिन्होंने उसके पास पनाह ली है बड़ी तसल्ली पाकर उस उम्मीद को मज़बूती से थामे रख सकते हैं जो हमें पेश की गई है।

    19क्योंकि यह उम्मीद हमारी जान के लिए मज़बूत लंगर है। और यह आसमानी बैतुल-मुक़द्दस के मुक़द्दसतरीन कमरे के परदे में से गुज़रकर उसमें दाख़िल होती है।

  6. Salmos 130

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 130
    Mostrando versículos 1–5 de 8

    1ज़ियारत का गीत।ऐ रब, मैं तुझे गहराइयों से पुकारता हूँ।

    2ऐ रब, मेरी आवाज़ सुन! कान लगाकर मेरी इल्तिजाओं पर ध्यान दे!

    5मैं रब के इंतज़ार में हूँ, मेरी जान शिद्दत से इंतज़ार करती है। मैं उसके कलाम से उम्मीद रखता हूँ।

  7. Gálatas 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 1–10 de 26

    1मसीह ने हमें आज़ाद रहने के लिए ही आज़ाद किया है। तो अब क़ायम रहें और दुबारा अपने गले में ग़ुलामी का जुआ डालने न दें।

    5लेकिन हमें एक फ़रक़ उम्मीद दिलाई गई है। उम्मीद यह है कि ख़ुदा ही हमें रास्तबाज़ क़रार देता है। चुनाँचे हम रूहुल-क़ुद्स के बाइस ईमान रखकर इसी रास्तबाज़ी के लिए तड़पते रहते हैं।

    10मुझे ख़ुदावंद में आप पर इतना एतमाद है कि आप यही सोच रखते हैं। जो भी आपमें अफ़रा-तफ़री पैदा कर रहा है उसे सज़ा मिलेगी।

  8. Salmos 33

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 33
    Mostrando versículos 20–22 de 22

    20हमारी जान रब के इंतज़ार में है। वही हमारा सहारा, हमारी ढाल है।

    21हमारा दिल उसमें ख़ुश है, क्योंकि हम उसके मुक़द्दस नाम पर भरोसा रखते हैं।

    22ऐ रब, तेरी मेहरबानी हम पर रहे, क्योंकि हम तुझ पर उम्मीद रखते हैं।

  9. Hebreus 11

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 11
    Mostrando versículos 1–6 de 40

    1ईमान क्या है? यह कि हम उसमें क़ायम रहें जिस पर हम उम्मीद रखते हैं और कि हम उसका यक़ीन रखें जो हम नहीं देख सकते।

    2ईमान ही से पुराने ज़मानों के लोगों को अल्लाह की क़बूलियत हासिल हुई।

    6और ईमान रखे बग़ैर हम अल्लाह को पसंद नहीं आ सकते। क्योंकि लाज़िम है कि अल्लाह के हुज़ूर आनेवाला ईमान रखे कि वह है और कि वह उन्हें अज्र देता है जो उसके तालिब हैं।

  10. Filipenses 4

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 4
    Mostrando versículos 4–23 de 23

    4हर वक़्त ख़ुदावंद में ख़ुशी मनाएँ। एक बार फिर कहता हूँ, ख़ुशी मनाएँ।

    5आपकी नरमदिली तमाम लोगों पर ज़ाहिर हो। याद रखें कि ख़ुदावंद आने को है।

    23ख़ुदावंद ईसा मसीह का फ़ज़ल आपकी रूह के साथ रहे। आमीन।

  11. Tiago 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 7–15 de 20

    7भाइयो, अब सब्र से ख़ुदावंद की आमद के इंतज़ार में रहें। किसान पर ग़ौर करें जो इस इंतज़ार में रहता है कि ज़मीन अपनी क़ीमती फ़सल पैदा करे। वह कितने सब्र से ख़रीफ़ और बहार की बारिशों का इंतज़ार करता है!

    13क्या आपमें से कोई मुसीबत में फँसा हुआ है? वह दुआ करे। क्या कोई ख़ुश है? वह सताइश के गीत गाए।

    15फिर ईमान से की गई दुआ मरीज़ को बचाएगी और ख़ुदावंद उसे उठा खड़ा करेगा। और अगर उसने गुनाह किया हो तो उसे मुआफ़ किया जाएगा।

  12. Salmos 71

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 71
    Mostrando versículos 1–12 de 24

    1ऐ रब, मैंने तुझमें पनाह ली है। मुझे कभी शरमिंदा न होने दे।

    5क्योंकि तू ही मेरी उम्मीद है। ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू मेरी जवानी ही से मेरा भरोसा रहा है।

    12ऐ अल्लाह, मुझसे दूर न हो। ऐ मेरे ख़ुदा, मेरी मदद करने में जल्दी कर।

  13. Romanos 8

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 8
    Mostrando versículos 24–37 de 39

    24क्योंकि नजात पाते वक़्त हमें यह उम्मीद दिलाई गई। लेकिन अगर वह कुछ नज़र आ चुका होता जिसकी उम्मीद हम रखते तो यह दर-हक़ीक़त उम्मीद न होती। कौन उस की उम्मीद रखे जो उसे नज़र आ चुका है?

    25लेकिन चूँकि हम उस की उम्मीद रखते हैं जो अभी नज़र नहीं आया तो लाज़िम है कि हम सब्र से उसका इंतज़ार करें।

    37कोई बात नहीं, क्योंकि मसीह हमारे साथ है और हमसे मुहब्बत रखता है। उसके वसीले से हम इन सब ख़तरों के रूबरू ज़बरदस्त फ़तह पाते हैं।

  14. Salmos 39

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 39
    Mostrando versículos 7–10 de 13

    7चुनाँचे ऐ रब, मैं किसके इंतज़ार में रहूँ? तू ही मेरी वाहिद उम्मीद है!

    8मेरे तमाम गुनाहों से मुझे छुटकारा दे। अहमक़ को मेरी रुसवाई करने न दे।

    10अपना अज़ाब मुझसे दूर कर! तेरे हाथ की ज़रबों से मैं हलाक हो रहा हूँ।

Léxico (correspondência exata) Semântico (correspondência relacionada) Versículos omitidos Contexto do capítulo