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Resultados da busca por "esperança"

17 resultados encontrados

  1. 1 Coríntios 13

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 4–13 de 13

    4मुहब्बत सब्र से काम लेती है, मुहब्बत मेहरबान है। न यह हसद करती है न डींगें मारती है। यह फूलती भी नहीं।

    7यह हमेशा दूसरों की कमज़ोरियाँ बरदाश्त करती है, हमेशा एतमाद करती है, हमेशा उम्मीद रखती है, हमेशा साबितक़दम रहती है।

    13ग़रज़ ईमान, उम्मीद और मुहब्बत तीनों क़ायम रहते हैं, लेकिन इनमें अफ़ज़ल मुहब्बत है।

  2. Romanos 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 2–5 de 21

    2हमारे ईमान लाने पर उसने हमें फ़ज़ल के उस मक़ाम तक पहुँचाया जहाँ हम आज क़ायम हैं। और यों हम इस उम्मीद पर फ़ख़र करते हैं कि हम अल्लाह के जलाल में शरीक होंगे।

    4साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।

    5और उम्मीद हमें शरमिंदा होने नहीं देती, क्योंकि अल्लाह ने हमें रूहुल-क़ुद्स देकर उसके वसीले से हमारे दिलों में अपनी मुहब्बत उंडेली है।

  3. Hebreus 6

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 6
    Mostrando versículos 15–19 de 20

    15इस पर इब्राहीम ने सब्र से इंतज़ार करके वह कुछ पाया जिसका वादा किया गया था।

    18ग़रज़, यह दो बातें क़ायम रही हैं, अल्लाह का वादा और उस की क़सम। वह इन्हें न तो बदल सकता न इनके बारे में झूट बोल सकता है। यों हम जिन्होंने उसके पास पनाह ली है बड़ी तसल्ली पाकर उस उम्मीद को मज़बूती से थामे रख सकते हैं जो हमें पेश की गई है।

    19क्योंकि यह उम्मीद हमारी जान के लिए मज़बूत लंगर है। और यह आसमानी बैतुल-मुक़द्दस के मुक़द्दसतरीन कमरे के परदे में से गुज़रकर उसमें दाख़िल होती है।

  4. Efésios 4

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 4
    Mostrando versículos 2–5 de 32

    2हर वक़्त हलीम और नरमदिल रहें, सब्र से काम लें और एक दूसरे से मुहब्बत रखकर उसे बरदाश्त करें।

    4एक ही बदन और एक ही रूह है। यों आपको भी एक ही उम्मीद के लिए बुलाया गया।

    5एक ख़ुदावंद, एक ईमान, एक बपतिस्मा है।

  5. Romanos 12

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 12
    Mostrando versículos 10–16 de 21

    10आपकी एक दूसरे के लिए बरादराना मुहब्बत सरगरम हो। एक दूसरे की इज़्ज़त करने में आप ख़ुद पहला क़दम उठाएँ।

    12उम्मीद में ख़ुश, मुसीबत में साबितक़दम और दुआ में लगे रहें।

    16एक दूसरे के साथ अच्छे ताल्लुक़ात रखें। ऊँची सोच न रखें बल्कि दबे हुओं से रिफ़ाक़त रखें। अपने आपको दाना मत समझें।

  6. Lucas 1

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 1
    Mostrando versículos 31–75 de 80

    31तू उम्मीद से होकर एक बेटे को जन्म देगी। तुझे उसका नाम ईसा (नजात देनेवाला) रखना है।

    74अब उसका यह वादा पूरा हो जाएगा :हम अपने दुश्मनों से मख़लसी पाकरख़ौफ़ के बग़ैर अल्लाह की ख़िदमत कर सकेंगे,

    75जीते-जी उसके हुज़ूर मुक़द्दस और रास्त ज़िंदगी गुज़ार सकेंगे।

  7. Salmos 39

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 39
    Mostrando versículos 7–12 de 13

    7चुनाँचे ऐ रब, मैं किसके इंतज़ार में रहूँ? तू ही मेरी वाहिद उम्मीद है!

    8मेरे तमाम गुनाहों से मुझे छुटकारा दे। अहमक़ को मेरी रुसवाई करने न दे।

    12ऐ रब, मेरी दुआ सुन और मदद के लिए मेरी आहों पर तवज्जुह दे। मेरे आँसुओं को देखकर ख़ामोश न रह। क्योंकि मैं तेरे हुज़ूर रहनेवाला परदेसी, अपने तमाम बापदादा की तरह तेरे हुज़ूर बसनेवाला ग़ैरशहरी हूँ।

  8. Salmos 130

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 130
    Mostrando versículos 1–5 de 8

    1ज़ियारत का गीत।ऐ रब, मैं तुझे गहराइयों से पुकारता हूँ।

    2ऐ रब, मेरी आवाज़ सुन! कान लगाकर मेरी इल्तिजाओं पर ध्यान दे!

    5मैं रब के इंतज़ार में हूँ, मेरी जान शिद्दत से इंतज़ार करती है। मैं उसके कलाम से उम्मीद रखता हूँ।

  9. 1 Crônicas 25

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 25
    Mostrando versículos 24–29 de 31

    2417. यसबिक़ाशा,

    2821. हौतीर,

    2922. जिद्दालती,

  10. Tiago 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 7–13 de 20

    7भाइयो, अब सब्र से ख़ुदावंद की आमद के इंतज़ार में रहें। किसान पर ग़ौर करें जो इस इंतज़ार में रहता है कि ज़मीन अपनी क़ीमती फ़सल पैदा करे। वह कितने सब्र से ख़रीफ़ और बहार की बारिशों का इंतज़ार करता है!

    9भाइयो, एक दूसरे पर मत बुड़बुड़ाना, वरना आपकी अदालत की जाएगी। मुंसिफ़ तो दरवाज़े पर खड़ा है।

    13क्या आपमें से कोई मुसीबत में फँसा हुआ है? वह दुआ करे। क्या कोई ख़ुश है? वह सताइश के गीत गाए।

  11. Isaías 33

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 33
    Mostrando versículos 2–22 de 24

    2ऐ रब, हम पर मेहरबानी कर! हम तुझसे उम्मीद रखते हैं। हर सुबह हमारी ताक़त बन, मुसीबत के वक़्त हमारी रिहाई का बाइस हो।

    11तुम उम्मीद से हो, लेकिन पेट में सूखी घास ही है, और जन्म देते वक़्त भूसा ही पैदा होगा। जब तुम फूँक मारोगे तो तुम्हारा दम आग बनकर तुम्हीं को राख कर देगा।

    22क्योंकि रब ही हमारा क़ाज़ी, रब ही हमारा सरदार और रब ही हमारा बादशाह है। वही हमें छुटकारा देगा।

  12. 1 Tessalonicenses 2

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 2
    Mostrando versículos 8–19 de 20

    8हमारी आपके लिए चाहत इतनी शदीद थी कि हम आपको न सिर्फ़ अल्लाह की ख़ुशख़बरी की बरकत में शरीक करने को तैयार थे बल्कि अपनी ज़िंदगियों में भी। हाँ, आप हमें इतने अज़ीज़ थे!

    10आप और अल्लाह हमारे गवाह हैं कि आप ईमान लानेवालों के साथ हमारा सुलूक कितना मुक़द्दस, रास्त और बेइलज़ाम था।

    19आख़िर आप ही हमारी उम्मीद और ख़ुशी का बाइस हैं। आप ही हमारा इनाम और हमारा ताज हैं जिस पर हम अपने ख़ुदावंद ईसा के हुज़ूर फ़ख़र करेंगे जब वह आएगा।

  13. Colossenses 1

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 1
    Mostrando versículos 5–11 de 29

    5आपका यह ईमान और मुहब्बत वह कुछ ज़ाहिर करते हैं जिसकी आप उम्मीद रखते हैं और जो आसमान पर आपके लिए महफ़ूज़ रखा गया है। और आपने यह उम्मीद उस वक़्त से रखी है जब से आपने पहली मरतबा सच्चाई का कलाम यानी अल्लाह की ख़ुशख़बरी सुनी।

    7आपने हमारे अज़ीज़ हमख़िदमत इपफ़्रास से इस ख़ुशख़बरी की तालीम पा ली थी। मसीह का यह वफ़ादार ख़ादिम हमारी जगह आपकी ख़िदमत कर रहा है।

    11और आप उस की जलाली क़ुदरत से मिलनेवाली हर क़िस्म की क़ुव्वत से तक़वियत पाकर हर वक़्त साबितक़दमी और सब्र से चल सकेंगे। आप ख़ुशी से

  14. Hebreus 10

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 10
    Mostrando versículos 23–32 de 39

    23आएँ, हम मज़बूती से उस उम्मीद को थामे रखें जिसका इक़रार हम करते हैं। हम डाँवाँडोल न हो जाएँ, क्योंकि जिसने इस उम्मीद का वादा किया है वह वफ़ादार है।

    25हम बाहम जमा होने से बाज़ न आएँ, जिस तरह बाज़ की आदत बन गई है। इसके बजाए हम एक दूसरे की हौसलाअफ़्ज़ाई करें, ख़ासकर यह बात मद्दे-नज़र रखकर कि ख़ुदावंद का दिन क़रीब आ रहा है।

    32ईमान के पहले दिन याद करें जब अल्लाह ने आपको रौशन कर दिया था। उस वक़्त के सख़्त मुक़ाबले में आपको कई तरह का दुख सहना पड़ा, लेकिन आप साबितक़दम रहे।

  15. Salmos 33

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 33
    Mostrando versículos 20–22 de 22

    20हमारी जान रब के इंतज़ार में है। वही हमारा सहारा, हमारी ढाल है।

    21हमारा दिल उसमें ख़ुश है, क्योंकि हम उसके मुक़द्दस नाम पर भरोसा रखते हैं।

    22ऐ रब, तेरी मेहरबानी हम पर रहे, क्योंकि हम तुझ पर उम्मीद रखते हैं।

  16. Salmos 71

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 71
    Mostrando versículos 1–12 de 24

    1ऐ रब, मैंने तुझमें पनाह ली है। मुझे कभी शरमिंदा न होने दे।

    5क्योंकि तू ही मेरी उम्मीद है। ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू मेरी जवानी ही से मेरा भरोसा रहा है।

    12ऐ अल्लाह, मुझसे दूर न हो। ऐ मेरे ख़ुदा, मेरी मदद करने में जल्दी कर।

  17. Salmos 27

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 27
    Mostrando versículos 1–14 de 14

    1दाऊद का ज़बूर।रब मेरी रौशनी और मेरी नजात है, मैं किससे डरूँ? रब मेरी जान की पनाहगाह है, मैं किससे दहशत खाऊँ?

    11ऐ रब, मुझे अपनी राह की तरबियत दे, हमवार रास्ते पर मेरी राहनुमाई कर ताकि अपने दुश्मनों से महफ़ूज़ रहूँ।

    14रब के इंतज़ार में रह! मज़बूत और दिलेर हो, और रब के इंतज़ार में रह!

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