5एक ख़ुदावंद, एक ईमान, एक बपतिस्मा है।
23अल्लाह को आपकी सोच की तजदीद करने दें
32एक दूसरे पर मेहरबान और रहमदिल हों और एक दूसरे को यों मुआफ़ करें जिस तरह अल्लाह ने आपको भी मसीह में मुआफ़ कर दिया है।
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5एक ख़ुदावंद, एक ईमान, एक बपतिस्मा है।
23अल्लाह को आपकी सोच की तजदीद करने दें
32एक दूसरे पर मेहरबान और रहमदिल हों और एक दूसरे को यों मुआफ़ करें जिस तरह अल्लाह ने आपको भी मसीह में मुआफ़ कर दिया है।
4अल्लाह के कलाम पर मेरा फ़ख़र है, अल्लाह पर मेरा भरोसा है। मैं डरूँगा नहीं, क्योंकि फ़ानी इनसान मुझे क्या नुक़सान पहुँचा सकता है?
10अल्लाह के कलाम पर मेरा फ़ख़र है, रब के कलाम पर मेरा फ़ख़र है।
11अल्लाह पर मेरा भरोसा है। मैं डरूँगा नहीं, क्योंकि फ़ानी इनसान मुझे क्या नुक़सान पहुँचा सकता है?
23अव्वीम, फ़ारा, उफ़रा,
26मिसफ़ाह, कफ़ीरा, मौज़ा,
27रक़म, इर्फ़एल, तराला,
20रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मान और उस की ख़िदमत कर। उससे लिपटा रह और उसी के नाम की क़सम खा।
21वही तेरा फ़ख़र है। वह तेरा ख़ुदा है जिसने वह तमाम अज़ीम और डरावने काम किए जो तूने ख़ुद देखे।
22जब तेरे बापदादा मिसर गए थे तो 70 अफ़राद थे। और अब रब तेरे ख़ुदा ने तुझे सितारों की मानिंद बेशुमार बना दिया है।