18 तख़्तनशीन होते वक़्त वह लावी के क़बीले के इमामों के पास पड़ी इस शरीअत की नक़ल लिखवाए। 19 यह किताब उसके पास महफ़ूज़ रहे, और वह उम्र-भर रोज़ाना इसे पढ़ता रहे ताकि रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मानना सीखे। तब वह शरीअत की तमाम बातों की पैरवी करेगा, 20 अपने आपको अपने इसराईली भाइयों से ज़्यादा अहम नहीं समझेगा और किसी तरह भी शरीअत से हटकर काम नहीं करेगा। नतीजे में वह और उस की औलाद बहुत अरसे तक इसराईल पर हुकूमत करेंगे।
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