बख़ूर जलाने की क़ुरबानगाह
1 कीकर की लकड़ी की क़ुरबानगाह बनाना जिस पर बख़ूर जलाया जाए।
6 इस क़ुरबानगाह को ख़ैमे के मुक़द्दस कमरे में उस परदे के सामने रखना जिसके पीछे अहद का संदूक़ और उसका ढकना होंगे, वह ढकना जहाँ मैं तुझसे मिला करूँगा। 7 जब हारून हर सुबह शमादान के चराग़ तैयार करे उस वक़्त वह उस पर ख़ुशबूदार बख़ूर जलाए। 8 सूरज के ग़ुरूब होने के बाद भी जब वह दुबारा चराग़ों की देख-भाल करेगा तो वह साथ साथ बख़ूर जलाए। यों रब के सामने बख़ूर मुतवातिर जलता रहे। लाज़िम है कि बाद की नसलें भी इस उसूल पर क़ायम रहें।
10 हारून साल में एक दफ़ा उसका कफ़्फ़ारा देकर उसे पाक करे। इसके लिए वह कफ़्फ़ारे के दिन उस क़ुरबानी का कुछ ख़ून सींगों पर लगाए। यह उसूल भी अबद तक क़ायम रहे। यह क़ुरबानगाह रब के लिए निहायत मुक़द्दस है।"