6 अपनी किसी भी फ़िकर में उलझकर परेशान न हो जाएँ बल्कि हर हालत में दुआ और इल्तिजा करके अपनी दरख़ास्तें अल्लाह के सामने पेश करें। ध्यान रखें कि आप यह शुक्रगुज़ारी की रूह में करें। 7 फिर अल्लाह की सलामती जो समझ से बाहर है आपके दिलों और ख़यालात को मसीह ईसा में महफ़ूज़ रखेगी।
8 भाइयो, एक आख़िरी बात, जो कुछ सच्चा है, जो कुछ शरीफ़ है, जो कुछ रास्त है, जो कुछ मुक़द्दस है, जो कुछ पसंदीदा है, जो कुछ उम्दा है, ग़रज़, अगर कोई अख़लाक़ी या क़ाबिले-तारीफ़ बात हो तो उसका ख़याल रखें। 9 जो कुछ आपने मेरे वसीले से सीख लिया, हासिल कर लिया, सुन लिया या देख लिया है उस पर अमल करें। फिर सलामती का ख़ुदा आपके साथ होगा।