5 वह उन क़ौमों के आबा-ओ-अजदाद हैं जो साहिली इलाक़ों और जज़ीरों में फैल गईं। यह याफ़त की औलाद हैं जो अपने अपने क़बीले और मुल्क में रहते हुए अपनी अपनी ज़बान बोलते हैं।
20 यह सब हाम की औलाद हैं, जो उनके अपने अपने क़बीले, अपनी अपनी ज़बान, अपने अपने मुल्क और अपनी अपनी क़ौम के मुताबिक़ दर्ज हैं।
31 यह सब सिम की औलाद हैं, जो अपने अपने क़बीले, अपनी अपनी ज़बान, अपने अपने मुल्क और अपनी अपनी क़ौम के मुताबिक़ दर्ज हैं।