17 यह ईमान का काम था कि इब्राहीम ने उस वक़्त इसहाक़ को क़ुरबानी के तौर पर पेश किया जब अल्लाह ने उसे आज़माया। हाँ, वह अपने इकलौते बेटे को क़ुरबान करने के लिए तैयार था अगरचे उसे अल्लाह के वादे मिल गए थे 18 कि "तेरी नसल इसहाक़ ही से क़ायम रहेगी।" 19 इब्राहीम ने सोचा, "अल्लाह मुरदों को भी ज़िंदा कर सकता है," और मजाज़न उसे वाक़ई इसहाक़ मुरदों में से वापस मिल गया।
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