ईसा की मौत
28 इसके बाद जब ईसा ने जान लिया कि मेरा मिशन तकमील तक पहुँच चुका है तो उसने कहा, "मुझे प्यास लगी है।" (इससे भी कलामे-मुक़द्दस की एक पेशगोई पूरी हुई।)
29 क़रीब मै के सिरके से भरा बरतन पड़ा था। उन्होंने एक इस्पंज सिरके में डुबोकर उसे ज़ूफ़े की शाख़ पर लगा दिया और उठाकर ईसा के मुँह तक पहुँचाया। 30 यह सिरका पीने के बाद ईसा बोल उठा, "काम मुकम्मल हो गया है।" और सर झुकाकर उसने अपनी जान अल्लाह के सुपुर्द कर दी।
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