ईसा बैतुल-मुक़द्दस में जाता है
13 जब यहूदी ईदे-फ़सह क़रीब आ गई तो ईसा यरूशलम चला गया। 14 बैतुल-मुक़द्दस में जाकर उसने देखा कि कई लोग उसमें गाय-बैल, भेड़ें और कबूतर बेच रहे हैं। दूसरे मेज़ पर बैठे ग़ैरमुल्की सिक्के बैतुल-मुक़द्दस के सिक्कों में बदल रहे हैं। 15 फिर ईसा ने रस्सियों का कोड़ा बनाकर सबको बैतुल-मुक़द्दस से निकाल दिया। उसने भेड़ों और गाय-बैलों को बाहर हाँक दिया, पैसे बदलनेवालों के सिक्के बिखेर दिए और उनकी मेज़ें उलट दीं। 16 कबूतर बेचनेवालों को उसने कहा, "इसे ले जाओ। मेरे बाप के घर को मंडी में मत बदलो।" 17 यह देखकर ईसा के शागिर्दों को कलामे-मुक़द्दस का यह हवाला याद आया कि "तेरे घर की ग़ैरत मुझे खा जाएगी।"
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