4 "रब्बुल-अफ़वाज जो इसराईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘ऐ तमाम जिलावतनो जिन्हें मैं यरूशलम से निकालकर बाबल ले गया हूँ, ध्यान से सुनो!
5 बाबल में घर बनाकर उनमें बसने लगो। बाग़ लगाकर उनका फल खाओ। 6 शादी करके बेटे-बेटियाँ पैदा करो। अपने बेटे-बेटियों की शादी कराओ ताकि उनके भी बच्चे पैदा हो जाएँ। ध्यान दो कि मुल्के-बाबल में तुम्हारी तादाद कम न हो जाए बल्कि बढ़ जाए। 7 उस शहर की सलामती के तालिब रहो जिसमें मैं तुम्हें जिलावतन करके ले गया हूँ। रब से उसके लिए दुआ करो! क्योंकि तुम्हारी सलामती उसी की सलामती पर मुनहसिर है।’