इफ़ताह की वापसी
34 इसके बाद इफ़ताह मिसफ़ाह वापस चला गया। वह अभी घर के क़रीब था कि उस की इकलौती बेटी दफ़ बजाती और नाचती हुई घर से निकल आई। इफ़ताह का कोई और बेटा या बेटी नहीं थी। 35 अपनी बेटी को देखकर वह रंज के मारे अपने कपड़े फाड़कर चीख़ उठा, "हाय मेरी बेटी! तूने मुझे ख़ाक में दबाकर तबाह कर दिया है, क्योंकि मैंने रब के सामने ऐसी क़सम खाई है जो बदली नहीं जा सकती।"
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