29 यह कहकर समसून ने उन दो मरकज़ी सतूनों को पकड़ लिया जिन पर छत का पूरा वज़न था। उनके दरमियान खड़े होकर उसने पूरी ताक़त से ज़ोर लगाया 30 और दुआ की, "मुझे फ़िलिस्तियों के साथ मरने दे!" अचानक सतून हिल गए और छत धड़ाम से फ़िलिस्तियों के तमाम सरदारों और बाक़ी लोगों पर गिर गई। इस तरह समसून ने पहले की निसबत मरते वक़्त कहीं ज़्यादा फ़िलिस्तियों को मार डाला।
31 समसून के भाई और बाक़ी घरवाले आए और उस की लाश को उठाकर उसके बाप मनोहा की क़ब्र के पास ले गए। वहाँ यानी सुरआ और इस्ताल के दरमियान उन्होंने उसे दफ़नाया। समसून 20 साल इसराईल का क़ाज़ी रहा।