समसून और दलीला
4 कुछ देर के बाद समसून एक औरत की मुहब्बत में गिरिफ़्तार हो गया जो वादीए-सूरिक़ में रहती थी। उसका नाम दलीला था। 5 यह सुनकर फ़िलिस्ती सरदार उसके पास आए और कहने लगे, "समसून को उकसाएँ कि वह आपको अपनी बड़ी ताक़त का भेद बताए। हम जानना चाहते हैं कि हम किस तरह उस पर ग़ालिब आकर उसे यों बाँध सकें कि वह हमारे क़ब्ज़े में रहे। अगर आप यह मालूम कर सकें तो हममें से हर एक आपको चाँदी के 1,100 सिक्के देगा।"