अमीर आदमी और लाज़र
19 एक अमीर आदमी का ज़िक्र है जो अरग़वानी रंग के कपड़े और नफ़ीस कतान पहनता और हर रोज़ ऐशो-इशरत में गुज़ारता था। 20 अमीर के गेट पर एक ग़रीब आदमी पड़ा था जिसके पूरे जिस्म पर नासूर थे। उसका नाम लाज़र था 21 और उस की बस एक ही ख़ाहिश थी कि वह अमीर की मेज़ से गिरे हुए टुकड़े खाकर सेर हो जाए। कुत्ते उसके पास आकर उसके नासूर चाटते थे।
22 फिर ऐसा हुआ कि ग़रीब आदमी मर गया। फ़रिश्तों ने उसे उठाकर इब्राहीम की गोद में बिठा दिया। अमीर आदमी भी फ़ौत हुआ और दफ़नाया गया। 23 वह जहन्नुम में पहुँचा। अज़ाब की हालत में उसने अपनी नज़र उठाई तो दूर से इब्राहीम और उस की गोद में लाज़र को देखा। 24 वह पुकार उठा, ‘ऐ मेरे बाप इब्राहीम, मुझ पर रहम करें। मेहरबानी करके लाज़र को मेरे पास भेज दें ताकि वह अपनी उँगली को पानी में डुबोकर मेरी ज़बान को ठंडा करे, क्योंकि मैं इस आग में तड़पता हूँ।’
25 लेकिन इब्राहीम ने जवाब दिया, ‘बेटा, याद रख कि तुझे अपनी ज़िंदगी में बेहतरीन चीज़ें मिल चुकी हैं जबकि लाज़र को बदतरीन चीज़ें। लेकिन अब उसे आराम और तसल्ली मिल गई है जबकि तुझे अज़ियत। 26 नीज़, हमारे और तुम्हारे दरमियान एक वसी ख़लीज क़ायम है। अगर कोई चाहे भी तो उसे पार करके यहाँ से तुम्हारे पास नहीं जा सकता, न वहाँ से कोई यहाँ आ सकता है।’ 27 अमीर आदमी ने कहा, ‘मेरे बाप, फिर मेरी एक और गुज़ारिश है, मेहरबानी करके लाज़र को मेरे वालिद के घर भेज दें। 28 मेरे पाँच भाई हैं। वह वहाँ जाकर उन्हें आगाह करे, ऐसा न हो कि उनका अंजाम भी यह अज़ियतनाक मक़ाम हो।’
29 लेकिन इब्राहीम ने जवाब दिया, ‘उनके पास मूसा की तौरेत और नबियों के सहीफ़े तो हैं। वह उनकी सुनें।’ 30 अमीर ने अर्ज़ की, ‘नहीं, मेरे बाप इब्राहीम, अगर कोई मुरदों में से उनके पास जाए तो फिर वह ज़रूर तौबा करेंगे।’ 31 इब्राहीम ने कहा, ‘अगर वह मूसा और नबियों की नहीं सुनते तो वह उस वक़्त भी क़ायल नहीं होंगे जब कोई मुरदों में से जी उठकर उनके पास जाएगा’।"
Domínio Público. Esta tradução bíblica de domínio público é trazida a você por cortesia de eBible.org.