31 क्योंकि रब इनसान को हमेशा तक रद्द नहीं करता।
32 उस की शफ़क़त इतनी अज़ीम है कि गो वह कभी इनसान को दुख पहुँचाए तो भी वह आख़िरकार उस पर दुबारा रहम करता है।
33 क्योंकि वह इनसान को दबाने और ग़म पहुँचाने में ख़ुशी महसूस नहीं करता।
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