22 यह सब कुछ इसलिए हुआ ताकि रब की वह बात पूरी हो जाए जो उसने अपने नबी की मारिफ़त फ़रमाई थी, 23 "देखो एक कुँवारी हामिला होगी। उससे बेटा पैदा होगा और वह उसका नाम इम्मानुएल रखेंगे।" (इम्मानुएल का मतलब ‘ख़ुदा हमारे साथ’ है।)
24 जब यूसुफ़ जाग उठा तो उसने रब के फ़रिश्ते के फ़रमान के मुताबिक़ मरियम से शादी कर ली और उसे अपने घर ले गया। 25 लेकिन जब तक उसके बेटा पैदा न हुआ वह मरियम से हमबिसतर न हुआ। और यूसुफ़ ने बच्चे का नाम ईसा रखा।
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