ख़ैरात
1 ख़बरदार! अपने नेक काम लोगों के सामने दिखावे के लिए न करो, वरना तुमको अपने आसमानी बाप से कोई अज्र नहीं मिलेगा।
2 चुनाँचे ख़ैरात देते वक़्त रियाकारों की तरह न कर जो इबादतख़ानों और गलियों में बिगुल बजाकर इसका एलान करते हैं ताकि लोग उनकी इज़्ज़त करें। मैं तुमको सच बताता हूँ, जितना अज्र उन्हें मिलना था उन्हें मिल चुका है। 3 इसके बजाए जब तू ख़ैरात दे तो तेरे दाएँ हाथ को पता न चले कि बायाँ हाथ क्या कर रहा है। 4 तेरी ख़ैरात यों पोशीदगी में दी जाए तो तेरा बाप जो पोशीदा बातें देखता है तुझे इसका मुआवज़ा देगा।
6 इसके बजाए जब तू दुआ करता है तो अंदर के कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर और फिर अपने बाप से दुआ कर जो पोशीदगी में है। फिर तेरा बाप जो पोशीदा बातें देखता है तुझे इसका मुआवज़ा देगा।