सुघड़ बीवी की तारीफ़
10 सुघड़ बीवी कौन पा सकता है? ऐसी औरत मोतियों से कहीं ज़्यादा बेशक़ीमत है। 11 उस पर उसके शौहर को पूरा एतमाद है, और वह नफ़ा से महरूम नहीं रहेगा। 12 उम्र-भर वह उसे नुक़सान नहीं पहुँचाएगी बल्कि बरकत का बाइस होगी।
13 वह ऊन और सन चुनकर बड़ी मेहनत से धागा बना लेती है। 14 तिजारती जहाज़ों की तरह वह दूर-दराज़ इलाक़ों से अपनी रोटी ले आती है।
15 वह पौ फटने से पहले ही जाग उठती है ताकि अपने घरवालों के लिए खाना और अपनी नौकरानियों के लिए उनका हिस्सा तैयार करे। 16 सोच-बिचार के बाद वह खेत ख़रीद लेती, अपने कमाए हुए पैसों से अंगूर का बाग़ लगा लेती है।
17 ताक़त से कमरबस्ता होकर वह अपने बाज़ुओं को मज़बूत करती है। 18 वह महसूस करती है, "मेरा कारोबार फ़ायदामंद है," इसलिए उसका चराग़ रात के वक़्त भी नहीं बुझता। 19 उसके हाथ हर वक़्त ऊन और कतान कातने में मसरूफ़ रहते हैं। 20 वह अपनी मुट्ठी मुसीबतज़दों और ग़रीबों के लिए खोलकर उनकी मदद करती है।
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