6 ऐ काहिल, चियूँटी के पास जाकर उस की राहों पर ग़ौर कर! उसके नमूने से हिकमत सीख ले। 7 उस पर न सरदार, न अफ़सर या हुक्मरान मुक़र्रर है, 8 तो भी वह गरमियों में सर्दियों के लिए खाने का ज़ख़ीरा कर रखती, फ़सल के दिनों में ख़ूब ख़ुराक इकट्ठी करती है। 9 ऐ काहिल, तू मज़ीद कब तक सोया रहेगा, कब जाग उठेगा? 10 तू कहता है, "मुझे थोड़ी देर सोने दे, थोड़ी देर ऊँघने दे, थोड़ी देर हाथ पर हाथ धरे बैठने दे ताकि आराम कर सकूँ।" 11 लेकिन ख़बरदार, जल्द ही ग़ुरबत राहज़न की तरह तुझ पर आएगी, मुफ़लिसी हथियार से लेस डाकू की तरह तुझ पर टूट पड़ेगी।
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