17 ग़रज़, ईमान पैग़ाम सुनने से पैदा होता है, यानी मसीह का कलाम सुनने से।
18 तो फिर सवाल यह है कि क्या इसराईलियों ने यह पैग़ाम नहीं सुना? उन्होंने इसे ज़रूर सुना। कलामे-मुक़द्दस में लिखा है,
"उनकी आवाज़ निकलकर पूरी दुनिया में सुनाई दी,
उनके अलफ़ाज़ दुनिया की इंतहा तक पहुँच गए।"
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