पूरी ज़िंदगी अल्लाह की ख़िदमत में
1 भाइयो, अल्लाह ने आप पर कितना रहम किया है! अब ज़रूरी है कि आप अपने बदनों को अल्लाह के लिए मख़सूस करें, कि वह एक ऐसी ज़िंदा और मुक़द्दस क़ुरबानी बन जाएँ जो उसे पसंद आए। ऐसा करने से आप उस की माक़ूल इबादत करेंगे। 2 इस दुनिया के साँचे में न ढल जाएँ बल्कि अल्लाह को आपकी सोच की तजदीद करने दें ताकि आप वह शक्लो-सूरत अपना सकें जो उसे पसंद है। फिर आप अल्लाह की मरज़ी को पहचान सकेंगे, वह कुछ जो अच्छा, पसंदीदा और कामिल है।
3 उस रहम की बिना पर जो अल्लाह ने मुझ पर किया मैं आपमें से हर एक को हिदायत देता हूँ कि अपनी हक़ीक़ी हैसियत को जानकर अपने आपको इससे ज़्यादा न समझें। क्योंकि जिस पैमाने से अल्लाह ने हर एक को ईमान बख़्शा है उसी के मुताबिक़ वह समझदारी से अपनी हक़ीक़ी हैसियत को जान ले।