14 रब का अज़ीम दिन क़रीब ही है, वह बड़ी तेज़ी से हम पर नाज़िल हो रहा है। सुनो! वह दिन तलख़ होगा। हालात ऐसे होंगे कि बहादुर फ़ौजी भी चीख़कर मदद के लिए पुकारेंगे। 15 रब का पूरा ग़ज़ब नाज़िल होगा, और लोग परेशानी और मुसीबत में मुब्तला रहेंगे। हर तरफ़ तबाहीओ-बरबादी, हर तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा, हर तरफ़ घने बादल छाए रहेंगे। 16 उस दिन दुश्मन नरसिंगा फूँककर और जंग के नारे लगाकर क़िलाबंद शहरों और बुर्जों पर टूट पड़ेगा। 17 रब फ़रमाता है, "चूँकि लोगों ने मेरा गुनाह किया है इसलिए मैं उनको बड़ी मुसीबत में उलझा दूँगा। वह अंधों की तरह टटोल टटोलकर इधर-उधर फिरेंगे, उनका ख़ून ख़ाक की तरह गिराया जाएगा और उनकी नाशें गोबर की तरह ज़मीन पर फेंकी जाएँगी।" 18 जब रब का ग़ज़ब नाज़िल होगा तो न उनका सोना, न चाँदी उन्हें बचा सकेगी। उस की ग़ैरत पूरे मुल्क को आग की तरह भस्म कर देगी। वह मुल्क के तमाम बाशिंदों को हलाक करेगा, हाँ उनका अंजाम हौलनाक होगा।
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