आसमान से हिकमत
13 क्या आपमें से कोई दाना और समझदार है? वह यह बात अपने अच्छे चाल-चलन से ज़ाहिर करे, हिकमत से पैदा होनेवाली हलीमी के नेक कामों से। 14 लेकिन ख़बरदार! अगर आप दिल में हसद की कड़वाहट और ख़ुदग़रज़ी पाल रहे हैं तो इस पर शेख़ी मत मारना, न सच्चाई के ख़िलाफ़ झूट बोलें। 15 ऐसा फ़ख़र आसमान की तरफ़ से नहीं है, बल्कि दुनियावी, ग़ैररूहानी और इबलीस से है। 16 क्योंकि जहाँ हसद और ख़ुदग़रज़ी है वहाँ फ़साद और हर शरीर काम पाया जाता है। 17 आसमान की हिकमत फ़रक़ है। अव्वल तो वह पाक और मुक़द्दस है। नीज़ वह अमनपसंद, नरमदिल, फ़रमाँबरदार, रहम और अच्छे फल से भरी हुई, ग़ैरजानिबदार और ख़ुलूसदिल है। 18 और जो सुलह कराते हैं उनके लिए रास्तबाज़ी का फल सलामती से बोया जाता है।