10 Milagres de Jesus na Bíblia: Lista com versículos e explicação
Os milagres de Jesus são muito mais do que demonstrações de poder sobrenatural; eles são sinais que confirmam sua divindade e missão. Ao longo dos Evangelhos, vemos Cristo curando enfermos, dominando a natureza e vencendo a morte.
Neste guia, selecionamos 10 milagres de Jesus na Bíblia, organizados com referências e uma breve explicação sobre o impacto espiritual de cada um deles.
Os principais milagres de Jesus nos Evangelhos
1. Transformação da Água em Vinho
Referência: João 2:1-11
Explicação: Ocorreu nas Bodas de Caná. Sendo o seu primeiro milagre público, Jesus demonstrou autoridade sobre a matéria e a natureza, revelando sua glória aos discípulos e abençoando a instituição da família.
काना के विवाह उत्सव में यीशु
तीसरे दिन गलील के काना में एक विवाह था, और यीशु की माता वहाँ थी। यीशु और उसके शिष्य भी उस विवाह में आमंत्रित थे। जब दाखरस कम पड़ गया तो यीशु की माता ने उससे कहा, "उनके पास दाखरस नहीं है।" यीशु ने उससे कहा,"हे नारी, इससे तेरा और मेरा क्या लेना-देना? अभी मेरा समय नहीं आया है।" उसकी माता ने सेवकों से कहा, "जो कुछ वह तुमसे कहे, वही करना।" उस समय वहाँ यहूदियों की शुद्धीकरण प्रथा के अनुसार पत्थर के छः घड़े रखे हुए थे, प्रत्येक में अस्सी से एक सौ बीस लीटर तक समाता था। यीशु ने सेवकों से कहा,"घड़ों को पानी से भर दो।" अतः उन्होंने उन्हें मुँह तक भर दिया। तब उसने उनसे कहा,"अब निकालकर भोज के प्रबंधक के पास ले जाओ।" और वे ले गए। जब भोज के प्रबंधक ने वह पानी चखा जो दाखरस बन गया था और नहीं जानता था कि यह कहाँ से आया है (परंतु जिन सेवकों ने पानी निकाला था, वे जानते थे), तो उसने दूल्हे को बुलाया और उससे कहा, "हर एक मनुष्य पहले अच्छा दाखरस देता है और जब लोग पीकर मतवाले हो जाते हैं तब उससे घटिया देता है। तूने तो अच्छा दाखरस अब तक बचा रखा है!" इस प्रकार यीशु ने गलील के काना में चिह्नों का आरंभ किया और अपनी महिमा प्रकट की, तथा उसके शिष्यों ने उस पर विश्वास किया।
2. Cura do cego de nascença
Referência: João 9:1-12
Explicação: Jesus usa lodo para curar um homem que nunca havia enxergado. Este milagre prova que Ele é a Luz do Mundo e tem poder para restaurar o que nasceu com defeito.
जन्म से अंधे मनुष्य को दृष्टि दान
फिर जाते हुए यीशु ने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म से अंधा था। उसके शिष्यों ने उससे पूछा, "रब्बी, किसने पाप किया कि यह अंधा जन्मा, इसने या इसके माता-पिता ने?" यीशु ने उत्तर दिया,"न तो इसने पाप किया और न ही इसके माता-पिता ने, परंतु यह इसलिए हुआ कि इसमें परमेश्वर के कार्य प्रकट हों। हमें उसके कार्यों को, जिसने मुझे भेजा है, दिन ही दिन में करना आवश्यक है, क्योंकि वह रात आने वाली है जब कोई कार्य नहीं कर सकता। जब तक मैं जगत में हूँ, इस जगत की ज्योति हूँ।" यह कहकर उसने भूमि पर थूका और उस थूक से मिट्टी सानी, और उस मिट्टी को उस अंधे व्यक्ति की आँखों पर लगाया और उससे कहा,"जा, शीलोह के कुंड में धो ले" (शीलोह का अर्थ है भेजा हुआ)। अतः उसने जाकर धोया और देखता हुआ लौट आया।
तब उसके पड़ोसी और वे, जिन्होंने उसे पहले एक भिखारी के रूप में देखा था, कहने लगे, "क्या यह वही नहीं, जो बैठकर भीख माँगा करता था?" कुछ लोग कह रहे थे, "यह वही है।" अन्य लोग कह रहे थे, "नहीं, परंतु यह उसी के जैसा दिखता है।" उसने कहा, "मैं वही हूँ।" तब वे उससे पूछने लगे, "फिर तेरी आँखें कैसे खुल गईं?" उसने उत्तर दिया, "यीशु नामक एक मनुष्य ने मिट्टी सानकर मेरी आँखों पर लगाई और मुझसे कहा कि शीलोह के कुंड में जा और धो ले। अतः जब मैंने जाकर धोया तो मैं देखने लगा।" उन्होंने उससे कहा, "वह कहाँ है?" उसने कहा, "मैं नहीं जानता।"
3. Multiplicação dos pães e peixes
Referência: Mateus 14:13-21
Explicação: Com apenas cinco pães e dois peixes, Jesus alimentou mais de 5 mil homens. Este sinal revela Cristo como o Pão da Vida, aquele que supre todas as nossas necessidades.
पाँच हज़ार से अधिक लोगों को भोजन खिलाना
यह सुनकर यीशु वहाँ से नाव में अकेला ही किसी निर्जन स्थान की ओर चला गया; जब लोगों ने यह सुना तो नगरों से पैदल ही उसके पीछे चल दिए। जब यीशु नाव से उतरा तो उसने एक बड़ी भीड़ को देखा और उसे लोगों पर तरस आया, और उसने उनके बीमारों को स्वस्थ किया। संध्या होने पर शिष्य उसके पास आकर कहने लगे, "यह स्थान निर्जन है और समय भी बीत चुका है; भीड़ को विदा कर, ताकि वे गाँवों में जाकर अपने लिए भोजन खरीद लें।" परंतु यीशु ने उनसे कहा,"उन्हें जाने की आवश्यकता नहीं; तुम ही उन्हें खाने को दो।" उन्होंने उससे कहा, "हमारे पास यहाँ पाँच रोटियों और दो मछलियों को छोड़ और कुछ भी नहीं है।" उसने कहा,"उन्हें यहाँ मेरे पास ले आओ।" तब उसने लोगों को घास पर बैठाने की आज्ञा देकर पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी, और रोटियाँ तोड़कर शिष्यों को दीं और शिष्यों ने लोगों को। सब ने खाया और तृप्त हो गए। फिर शिष्यों ने बचे हुए टुकड़ों से भरी बारह टोकरियाँ उठाईं। खानेवालों में स्त्रियों और बच्चों को छोड़ लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे।
4. Jesus acalma a tempestade
Referência: Marcos 4:35-41
Explicação: Com uma ordem, o vento e o mar se aquietam. O milagre ensina sobre a paz que excede o entendimento e a autoridade do Messias sobre a criação.
आँधी को शांत करना
उसी दिन जब संध्या हुई तो यीशु ने उनसे कहा,"आओ, हम उस पार चलें।" इसलिए वे भीड़ को छोड़कर, जैसा वह नाव में था, वैसा ही उसे अपने साथ ले गए, और उसके साथ दूसरी नावें भी थीं। तब एक बड़ी आँधी आई और लहरें नाव से टकराने लगीं, यहाँ तक कि अब नाव में पानी भरने लगा। परंतु वह नाव के पिछले भाग में तकिया लगाकर सो रहा था। उन्होंने उसे जगाया और उससे कहा, "हे गुरु, क्या तुझे चिंता नहीं कि हम नाश हो रहे हैं?" उसने उठकर आँधी को डाँटा और झील से कहा,"शांत हो जा! थम जा!" और आँधी थम गई और बड़ी शांति छा गई। तब उसने उनसे कहा,"तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अभी भी विश्वास नहीं?" वे अत्यंत भयभीत हो गए और आपस में कहने लगे, "आखिर यह है कौन कि आँधी और झील भी इसकी आज्ञा मानते हैं?"
5. Cura da mulher com fluxo de sangue
Referência: Marcos 5:25-34
Explicação: Uma cura que aconteceu pelo toque da fé. Jesus mostra que está atento ao sofrimento individual e que a fé é o canal para receber o milagre.
एक स्त्री थी जो बारह वर्ष से रक्तस्राव से पीड़ित थी। उसने अनेक वैद्यों के हाथों बहुत दुःख उठाया और अपना सब कुछ खर्च करने पर भी उसे कुछ लाभ नहीं हुआ बल्कि उसकी दशा और भी अधिक बिगड़ गई। उसने यीशु के विषय में सुना और भीड़ में पीछे से आकर उसका वस्त्र छू लिया, क्योंकि उसका कहना था, "यदि मैं उसके वस्त्र ही को छू लूँगी तो मैं स्वस्थ हो जाऊँगी।" तब तुरंत उसका रक्तस्राव बंद हो गया और उसने अपनी देह में जान लिया कि वह इस बीमारी से अच्छी हो गई है।
यीशु ने तुरंत अपने में जान लिया कि उसमें से सामर्थ्य निकला है। उसने भीड़ की ओर मुड़कर पूछा,"मेरे वस्त्र को किसने छुआ?" तब उसके शिष्यों ने उससे कहा, "तू देख रहा है कि भीड़ तुझ पर गिरी जा रही है और तू पूछ रहा है, ‘मुझे किसने छुआ?’ " फिर भी यीशु यह पता लगाने के लिए कि यह किसने किया है, चारों ओर देखने लगा। तब वह स्त्री यह जानकर कि उसके साथ क्या हुआ है, डरती और काँपती हुई आई और उसके सामने गिर पड़ी, और उसे सारी बात सच-सच बता दी। तब यीशु ने उससे कहा,"बेटी, तेरे विश्वास ने तुझे स्वस्थ कर दिया है। शांति से जा और अपनी बीमारी से बची रह।"
6. Libertação do endemoninhado Gadareno
Referência: Marcos 5:1-20
Explicação: Jesus liberta um homem dominado por uma legião de espíritos. É a prova clara de sua autoridade absoluta sobre o reino das trevas.
दुष्टात्माग्रस्त मनुष्य का छुटकारा
फिर वे झील के उस पार गिरासेनियों के क्षेत्र में आए। जब यीशु नाव से उतरा तो तुरंत एक मनुष्य जिसमें अशुद्ध आत्मा थी, कब्रों के बाहर उससे मिला। वह कब्रों में रहा करता था। कोई उसे ज़ंजीरों से भी नहीं बाँध सकता था, क्योंकि उसे बार-बार बेड़ियों और ज़ंजीरों से बाँधा जाता था परंतु वह ज़ंजीरों को टुकड़े-टुकड़े कर देता और बेड़ियों को भी तोड़ डालता था और कोई भी उसे वश में नहीं कर सकता था। वह निरंतर रात और दिन कब्रों और पहाड़ों में चिल्लाता रहता और स्वयं को पत्थरों से घायल करता रहता था। वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा और उसके चरणों पर गिर पड़ा और ऊँची आवाज़ से चिल्लाते हुए कहा, "हे परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र यीशु, तुझसे मेरा क्या लेना-देना? मैं तुझे परमेश्वर की शपथ देता हूँ कि मुझे यातना न दे।" क्योंकि यीशु उससे कह रहा था,"हे अशुद्ध आत्मा, इस मनुष्य में से निकल जा!" फिर यीशु ने उससे पूछा,"तेरा नाम क्या है?" उसने उससे कहा, "मेरा नाम सेना है क्योंकि हम बहुत हैं।" तब वह उससे गिड़गिड़ाकर विनती करने लगा कि उन्हें उस क्षेत्र से बाहर न भेजे।
वहीं पहाड़ के पास सूअरों का एक बड़ा झुंड चर रहा था। उन्होंने उससे यह कहकर विनती की, "हमें इन सूअरों में भेज दे कि हम उनमें समा जाएँ।" अतः उसने उन्हें अनुमति दे दी। फिर अशुद्ध आत्माएँ उसमें से निकलकर सूअरों में समा गईं, और वह झुंड जो लगभग दो हज़ार का था, ढलान से नीचे झील की ओर तेज़ी से भागा और झील में जा डूबा।
उनके चरवाहे भाग गए और नगर तथा गाँवों में जाकर समाचार सुनाया; तब लोग देखने आए कि क्या हुआ। फिर वे यीशु के पास आए और उस दुष्टात्माग्रस्त को, जिसमें सेना थी, वस्त्र पहने तथा सचेत बैठे हुए देखा, और वे डर गए। तब देखनेवालों ने उन्हें सब कुछ बता दिया कि उस दुष्टात्माग्रस्त व्यक्ति और सूअरों के साथ क्या हुआ था। फिर वे लोग यीशु से अपने क्षेत्र से चले जाने की विनती करने लगे।
जब यीशु नाव पर चढ़ने लगा तो वह व्यक्ति जो दुष्टात्माग्रस्त था उससे विनती करने लगा कि वह उसे अपने साथ रहने दे। परंतु यीशु ने उसे आने न दिया बल्कि उससे कहा,"तू अपने लोगों के पास अपने घर जा और उन्हें बता कि प्रभु ने तेरे लिए कैसे बड़े कार्य किए हैं और तुझ पर कैसी दया की।" अतः वह चला गया और दिकापुलिस में प्रचार करने लगा कि यीशु ने उसके लिए कैसे बड़े कार्य किए हैं, और सब चकित रह गए।
7. Ressurreição da filha de Jairo
Referência: Marcos 5:21-43
Explicação: Jesus demonstra que a morte para Ele é como o sono. Ele restaura a vida de uma criança, trazendo esperança para uma família desesperada.
याईर की बेटी और रक्तस्राव से पीड़ित स्त्री
जब यीशु नाव से फिर उस पार गया तो उसके पास एक बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई; और वह झील के किनारे था। तब आराधनालय के अधिकारियों में से याईर नामक एक अधिकारी आया और यीशु को देखकर उसके चरणों पर गिर पड़ा, और उससे गिड़गिड़ाकर विनती करने लगा, "मेरी छोटी सी बेटी मरने पर है; तू आकर उस पर अपना हाथ रख दे कि वह ठीक हो जाए और जीवित रहे।" अतः वह उसके साथ चल दिया।
एक बड़ी भीड़ उसके पीछे-पीछे चल रही थी और लोग उस पर गिरे जा रहे थे। एक स्त्री थी जो बारह वर्ष से रक्तस्राव से पीड़ित थी। उसने अनेक वैद्यों के हाथों बहुत दुःख उठाया और अपना सब कुछ खर्च करने पर भी उसे कुछ लाभ नहीं हुआ बल्कि उसकी दशा और भी अधिक बिगड़ गई। उसने यीशु के विषय में सुना और भीड़ में पीछे से आकर उसका वस्त्र छू लिया, क्योंकि उसका कहना था, "यदि मैं उसके वस्त्र ही को छू लूँगी तो मैं स्वस्थ हो जाऊँगी।" तब तुरंत उसका रक्तस्राव बंद हो गया और उसने अपनी देह में जान लिया कि वह इस बीमारी से अच्छी हो गई है।
यीशु ने तुरंत अपने में जान लिया कि उसमें से सामर्थ्य निकला है। उसने भीड़ की ओर मुड़कर पूछा,"मेरे वस्त्र को किसने छुआ?" तब उसके शिष्यों ने उससे कहा, "तू देख रहा है कि भीड़ तुझ पर गिरी जा रही है और तू पूछ रहा है, ‘मुझे किसने छुआ?’ " फिर भी यीशु यह पता लगाने के लिए कि यह किसने किया है, चारों ओर देखने लगा। तब वह स्त्री यह जानकर कि उसके साथ क्या हुआ है, डरती और काँपती हुई आई और उसके सामने गिर पड़ी, और उसे सारी बात सच-सच बता दी। तब यीशु ने उससे कहा,"बेटी, तेरे विश्वास ने तुझे स्वस्थ कर दिया है। शांति से जा और अपनी बीमारी से बची रह।"
अभी वह यह कह ही रहा था कि आराधनालय के अधिकारी के घर से लोगों ने आकर कहा, "तेरी बेटी तो मर गई, अब गुरु को क्यों कष्ट देता है?" परंतु यीशु ने उनकी बात पर ध्यान न देकर आराधनालय के अधिकारी से कहा,"मत डर! केवल विश्वास रख!" और उसने पतरस, याकूब और याकूब के भाई यूहन्ना को छोड़ और किसी को अपने साथ आने नहीं दिया।
जब वे आराधनालय के अधिकारी के घर पहुँचे तो उसने कोलाहल मचा हुआ और लोगों को बहुत रोते और बिलखते हुए देखा। तब यीशु ने भीतर जाकर उनसे कहा,"तुम क्यों रोते और हल्ला मचाते हो? बच्ची मरी नहीं बल्कि सो रही है।" वे उसकी हँसी उड़ाने लगे; परंतु उसने सब को बाहर निकाल दिया और बच्ची के पिता और उसकी माता तथा अपने साथियों को लेकर भीतर गया, जहाँ वह बच्ची थी। तब उसने उस बच्ची का हाथ पकड़कर कहा,"तलीथा कूमी" जिसका अर्थ है,हे लड़की, मैं तुझसे कहता हूँ, उठ! वह लड़की तुरंत उठ खड़ी हुई और चलने-फिरने लगी क्योंकि वह बारह वर्ष की थी। इस पर लोग अत्यंत चकित हो गए। तब यीशु ने उन्हें कड़ा आदेश दिया कि यह बात किसी को भी पता न चले; और कहा कि लड़की को कुछ खाने के लिए दिया जाए।
8. Jesus anda sobre as águas
Referência: Mateus 14:22-33
Explicação: Ao caminhar sobre o Mar da Galileia, Jesus mostra que não está sujeito às leis da física. O episódio também serve para tratar a fé e a dúvida no coração de Pedro.
यीशु का पानी पर चलना
फिर यीशु ने तुरंत शिष्यों को नाव पर चढ़ने और उससे पहले उस पार चले जाने के लिए विवश किया, जबकि वह लोगों को विदा करता रहा। लोगों को विदा करके वह एकांत में प्रार्थना करने के लिए पहाड़ पर चढ़ गया। संध्या होने पर वह वहाँ अकेला था। परंतु उस समय नाव किनारे से कई मील दूर लहरों के थपेड़े खा रही थी, क्योंकि हवा विपरीत थी। रात के लगभग तीन बजे यीशु झील पर चलते हुए उनके पास आया। परंतु जब शिष्यों ने उसे झील पर चलते हुए देखा तो घबरा गए और कहने लगे, "यह तो कोई भूत है।" और डर के मारे चिल्ला उठे। यीशु ने तुरंत उनसे बातें कीं और कहा,"साहस रखो, मैं हूँ, डरो मत।" इस पर पतरस ने उससे कहा, "हे प्रभु, यदि यह तू ही है, तो मुझे पानी पर चलकर अपने पास आने की आज्ञा दे।" उसने कहा,"आ जा।" तब पतरस नाव से उतरा और पानी पर चलकर यीशु की ओर आया। परंतु तेज़ हवा को देखकर वह डर गया, और जब डूबने लगा तो चिल्लाकर कहा, "प्रभु, मुझे बचा!" यीशु ने तुरंत अपना हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया और उससे कहा,"हे अल्पविश्वासी, तूने क्यों संदेह किया?" जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई; और जो नाव में थे, उन्होंने उसे दंडवत् करके कहा, "सचमुच, तू परमेश्वर का पुत्र है।"
9. Cura do paralítico
Referência: Marcos 2:1-12
Explicação: Jesus cura o corpo, mas primeiro perdoa os pecados. Este milagre estabelece que sua missão principal é a reconciliação espiritual do homem com Deus.
लकवे के रोगी का स्वस्थ किया जाना
कुछ दिनों के बाद जब यीशु कफरनहूम में वापस आया तो यह सुना गया कि वह घर में है। फिर इतने लोग इकट्ठे हो गए कि द्वार पर भी कोई स्थान नहीं रहा और वह उन्हें वचन सुना रहा था। तभी लोग एक लकवे के रोगी को चार लोगों से उठवाकर उसके पास ले आए। परंतु जब वे भीड़ के कारण उसे यीशु के पास नहीं पहुँचा सके तो उन्होंने उस छत को, जिसके नीचे यीशु था, खोल दिया और खुली जगह बनाकर उस बिछौने को, जिस पर वह लकवे का रोगी पड़ा था, नीचे उतार दिया। तब यीशु ने उनके विश्वास को देखकर उस लकवे के रोगी से कहा,"पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।" परंतु वहाँ कुछ शास्त्री बैठे हुए थे और वे अपने-अपने मन में विचार करने लगे, "यह ऐसा क्यों बोल रहा है? यह तो परमेश्वर की निंदा कर रहा है! परमेश्वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है?"
तब यीशु ने तुरंत अपने आत्मा में जानकर कि वे अपने मन में इस प्रकार विचार कर रहे हैं, उनसे कहा,"तुम अपने-अपने मन में क्यों यह विचार कर रहे हो? सहज क्या है? लकवे के रोगी से यह कहना, ‘तेरे पाप क्षमा हुए’ या यह कहना, ‘उठ, अपना बिछौना उठा और चल फिर’? अब इससे तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है," उसने उस लकवे के रोगी से कहा, "मैं तुझसे कहता हूँ, उठ, अपना बिछौना उठा और अपने घर चला जा!" वह उठा और तुरंत बिछौना उठाकर सब के सामने से बाहर निकल गया। इससे वे सब चकित हुए और परमेश्वर की महिमा करते हुए कहने लगे, "हमने ऐसा कभी नहीं देखा।"
10. Ressurreição de Lázaro
Referência: João 11:1-44
Explicação: O milagre mais impactante antes da crucificação. Ao ressuscitar alguém morto há quatro dias, Jesus declara: "Eu sou a ressurreição e a vida".
लाज़र की मृत्यु
मरियम और उसकी बहन मार्था के गाँव बैतनिय्याह का लाज़र नामक एक व्यक्ति बीमार था। यह वही मरियम थी जिसने प्रभु पर इत्र डालकर उसके पैरों को अपने बालों से पोंछा था, इसी का भाई लाज़र बीमार था। इसलिए इन बहनों ने उसके पास यह कहला भेजा, "प्रभु! देख, जिससे तू प्रीति रखता है, वह बीमार है।" यह सुनकर यीशु ने कहा,"यह बीमारी मृत्यु की नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा के लिए है, ताकि इसके द्वारा परमेश्वर के पुत्र की महिमा हो।" यीशु, मार्था और उसकी बहन और लाज़र से प्रेम रखता था। फिर जब उसने सुना कि वह बीमार है, तो जिस स्थान पर वह था, वहाँ दो दिन और रहा। तब इसके बाद उसने अपने शिष्यों से कहा,"आओ, हम फिर यहूदिया को चलें।" शिष्यों ने उससे कहा, "रब्बी, अभी तो यहूदी तुझ पर पथराव करना चाह रहे थे, और क्या तू फिर वहीं जा रहा है?" यीशु ने उत्तर दिया,"क्या दिन के बारह घंटे नहीं होते? यदि कोई दिन में चलता है तो ठोकर नहीं खाता, क्योंकि वह इस जगत की ज्योति को देखता है। परंतु यदि कोई रात में चलता है तो ठोकर खाता है, क्योंकि उसमें ज्योति नहीं है।" उसने ये बातें कहीं और इसके बाद उनसे कहा,"हमारा मित्र लाज़र सो गया है, और मैं उसे जगाने के लिए जा रहा हूँ।" तब शिष्यों ने उससे कहा, "प्रभु, यदि वह सो गया है तो बच जाएगा।" यीशु ने उसकी मृत्यु के विषय में कहा था। परंतु उन्होंने समझा कि वह विश्राम की नींद के विषय में कह रहा है। तब यीशु ने उनसे स्पष्ट कहा,"लाज़र मर गया, और मैं तुम्हारे कारण आनंदित हूँ कि मैं वहाँ नहीं था, जिससे कि तुम विश्वास करो। आओ हम उसके पास चलें।" इस पर थोमा ने, जो दिदुमुस भी कहलाता है, अपने साथी शिष्यों से कहा, "आओ, हम भी उसके साथ मरने चलें।"
पुनरुत्थान और जीवन यीशु है
जब यीशु वहाँ पहुँचा तो उसे पता चला कि लाज़र को कब्र में रखे चार दिन हो गए हैं। बैतनिय्याह, यरूशलेम से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर था। बहुत से यहूदी मार्था और मरियम के पास आए थे ताकि उन्हें उनके भाई के विषय में सांत्वना दें। जब मार्था ने सुना कि यीशु आ रहा है तो वह उससे मिलने गई, परंतु मरियम घर में ही बैठी रही। मार्था ने यीशु से कहा, "प्रभु, यदि तू यहाँ होता तो मेरा भाई नहीं मरता। परंतु अब भी मैं जानती हूँ कि जो कुछ तू परमेश्वर से माँगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।" यीशु ने उससे कहा,"तेरा भाई फिर जी उठेगा।" मार्था ने उससे कहा, "मैं जानती हूँ कि अंतिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह फिर जी उठेगा।" यीशु ने उससे कहा,"पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ। जो मुझ पर विश्वास करता है, चाहे वह मर भी जाए फिर भी जीएगा, और जो जीवित है और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनंत काल तक कभी नहीं मरेगा। क्या तू यह विश्वास करती है?" उसने उससे कहा, "हाँ प्रभु, मैं तो विश्वास कर चुकी हूँ कि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है जो जगत में आनेवाला था।"
यीशु रोया
यह कहकर वह चली गई और अपनी बहन मरियम को यह कहकर चुपके से बुलाया, "गुरु यहीं है और तुझे बुला रहा है।" जब उसने यह सुना तो वह शीघ्र उठी और उसके पास जाने लगी। यीशु अभी गाँव में नहीं पहुँचा था, बल्कि वह अब तक उसी स्थान पर था जहाँ मार्था उससे मिली थी। तब जो यहूदी मरियम के साथ घर में थे और उसे सांत्वना दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम शीघ्र उठकर बाहर चली गई, उसके पीछे चल दिए; क्योंकि उन्होंने सोचा कि वह कब्र पर रोने के लिए जा रही है। जब मरियम वहाँ पहुँची जहाँ यीशु था तो उसे देखकर उसके पैरों पर गिर पड़ी और उससे कहने लगी, "प्रभु, यदि तू यहाँ होता तो मेरा भाई नहीं मरता।" यीशु ने जब उसको और उसके साथ आए हुए यहूदियों को रोते हुए देखा, तो वह आत्मा में अत्यंत व्यथित और व्याकुल हो गया, और कहा,"तुमने उसे कहाँ रखा है?" उन्होंने उससे कहा, "प्रभु, आ और देख ले।" यीशु रो पड़ा। तब यहूदी कहने लगे, "देखो! वह उससे कितनी प्रीति रखता था।" परंतु उनमें से कुछ लोगों ने कहा, "जिसने अंधे व्यक्ति की आँखें खोलीं, क्या वह यह नहीं कर सका कि यह मनुष्य न मरता?"
लाज़र का जिलाया जाना
तब यीशु फिर से मन ही मन में अत्यंत व्यथित होकर कब्र पर आया। वह एक गुफा थी, और उस पर एक पत्थर रखा हुआ था। यीशु ने कहा,"पत्थर को हटाओ।" मृतक की बहन, मार्था ने उससे कहा, "प्रभु, अब तो उसमें से दुर्गंध आती है, क्योंकि यह चौथा दिन है।" यीशु ने उससे कहा,"क्या मैंने तुझसे नहीं कहा कि यदि तू विश्वास करेगी तो परमेश्वर की महिमा देखेगी?" तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया। फिर यीशु ने अपनी आँखें ऊपर उठाईं और कहा,"हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मेरी सुन ली। मैं जानता था कि तू सदैव मेरी सुनता है; फिर भी चारों ओर खड़े इन लोगों के कारण मैंने यह कहा, ताकि ये विश्वास करें कि तूने मुझे भेजा है।" और यह कहकर उसने ऊँची आवाज़ से पुकारा,"हे लाज़र, बाहर आ।" जो मर गया था, वह कफ़न से हाथ और पैर बँधे हुए निकल आया, और उसका चेहरा अंगोछे से लिपटा हुआ था। यीशु ने उनसे कहा,"उसे खोल दो और जाने दो।"
Conclusão
Os milagres de Jesus revelam sua autoridade sobre a natureza, as enfermidades, o mundo espiritual e até a morte. Eles não são apenas demonstrações de poder, mas sinais que apontam para sua identidade e missão.
Ao estudar esses milagres, é possível compreender melhor o papel de Jesus e a mensagem central do Evangelho.
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