A última palavra vem do Senhor
A última palavra pertence ao Senhor. Os planos do homem estão sujeitos à soberania de Deus. Ele rege toda a história e nenhum de seus propósitos pode ser frustrado.
मनुष्य के मन में विचार उत्पन्न होते हैं,
परंतु मुँह के बोल यहोवा की ओर से होते हैं।
यहोवा ने हर वस्तु को एक उद्देश्य के लिए रचा है,
यहाँ तक कि दुष्ट को विपत्ति के दिन के लिए।
यहोवा जो चाहता है,
वह उसे आकाश और पृथ्वी और समुद्र
और सब गहरे स्थानों में करता है।
वह सब में प्रथम है और सब उसी में स्थिर रहते हैं।
आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परंतु मेरे वचन कदापि न टलेंगे।
तुम यह भी नहीं जानते कि कल तुम्हारे जीवन का क्या होगा—क्योंकि तुम तो भाप के समान हो जो थोड़ी देर दिखाई देती है, और फिर लुप्त हो जाती है— इसके बदले तुम्हें यह कहना चाहिए, "यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे और यह या वह कार्य करेंगे।"