O adultério
O adultério é pecado grave que destrói alianças, famílias e vidas. A Bíblia condena firmemente a infidelidade conjugal e chama à pureza, fidelidade e santidade no casamento.
A lei de Deus
Não adulterarás. Quem comete adultério destrói a própria alma. A Palavra de Deus é clara e direta sobre este pecado.
"तू व्यभिचार न करना।
फिर यदि कोई पराई स्त्री के साथ व्यभिचार करे, तो जिसने किसी दूसरे की स्त्री के साथ व्यभिचार किया हो तो वह व्यभिचारी और वह व्यभिचारिणी दोनों निश्चय मार डालें जाएँ। (यूह. 8:5)
फिर अपने भाई-बन्धु की स्त्री से कुकर्म करके अशुद्ध न हो जाना।
जो परस्त्रीगमन करता है वह निरा निर्बुद्ध है;
जो ऐसा करता है, वह अपने प्राण को नाश करता है।
जो परस्त्रीगमन करता है वह निरा निर्बुद्ध है;
जो ऐसा करता है, वह अपने प्राण को नाश करता है।
उसको घायल और अपमानित होना पड़ेगा,
और उसकी नामधराई कभी न मिटेगी।
क्योंकि जलन से पुरुष बहुत ही क्रोधित हो जाता है,
और जब वह बदला लेगा तब कोई दया नहीं दिखाएगा।
वह मुआवजे में कुछ न लेगा,
और चाहे तू उसको बहुत कुछ दे, तो भी वह न मानेगा।
क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले;
और उसके कपड़े न जलें?
क्या हो सकता है कि कोई अंगारे पर चले,
और उसके पाँव न झुलसें?
जो पराई स्त्री के पास जाता है, उसकी दशा ऐसी है;
वरन् जो कोई उसको छूएगा वह दण्ड से न बचेगा।
Jesus ensina
Quem olhar para uma mulher com intenção impura já adulterou no coração. Jesus elevou o padrão da pureza.
"तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, ‘व्यभिचार न करना।’ (व्यव. 5:18, निर्ग. 20:14) परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उससे व्यभिचार कर चुका।
परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ कि जो कोई अपनी पत्नी को व्यभिचार के सिवा किसी और कारण से तलाक दे, तो वह उससे व्यभिचार करवाता है; और जो कोई उस त्यागी हुई से विवाह करे, वह व्यभिचार करता है।
क्योंकि बुरे विचार, हत्या, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलती है।
उसने उनसे कहा, "जो कोई अपनी पत्नी को त्याग कर दूसरी से विवाह करे तो वह उस पहली के विरोध में व्यभिचार करता है। और यदि पत्नी अपने पति को छोड़कर दूसरे से विवाह करे, तो वह व्यभिचार करती है।"
"जो कोई अपनी पत्नी को त्याग कर दूसरी से विवाह करता है, वह व्यभिचार करता है, और जो कोई ऐसी त्यागी हुई स्त्री से विवाह करता है, वह भी व्यभिचार करता है।
"हे गुरु, यह स्त्री व्यभिचार करते पकड़ी गई है। व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्त्रियों को पथराव करें; अतः तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है?" (लैव्य. 20:10) उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएँ, परन्तु यीशु झुककर उँगली से भूमि पर लिखने लगा। जब वे उससे पूछते रहे, तो उसने सीधे होकर उनसे कहा, "तुम में जो निष्पाप हो, वही पहले उसको पत्थर मारे।" (रोम. 2:1) और फिर झुककर भूमि पर उँगली से लिखने लगा। परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से लेकर छोटों तक एक-एक करके निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई। यीशु ने सीधे होकर उससे कहा, "हे नारी, वे कहाँ गए? क्या किसी ने तुझ पर दण्ड की आज्ञा न दी?" उसने कहा, "हे प्रभु, किसी ने नहीं।" यीशु ने कहा, "मैं भी तुझ पर दण्ड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।"
Armadilhas e consequências
Os lábios da mulher estranha destilam mel, mas o seu fim é amargo. Fuja da imoralidade — o adultério escraviza.
क्योंकि पराई स्त्री के होठों से मधु टपकता है,
और उसकी बातें तेल से भी अधिक चिकनी होती हैं;
परन्तु इसका परिणाम नागदौना के समान कड़वा
और दोधारी तलवार के समान पैना होता है।
उसके पाँव मृत्यु की ओर बढ़ते हैं;
और उसके पग अधोलोक तक पहुँचते हैं।
वह जीवन के मार्ग के विषय विचार नहीं करती;
उसके चाल चलन में चंचलता है, परन्तु उसे वह स्वयं नहीं जानती।
क्योंकि पराई स्त्री के होठों से मधु टपकता है,
और उसकी बातें तेल से भी अधिक चिकनी होती हैं;
परन्तु इसका परिणाम नागदौना के समान कड़वा
और दोधारी तलवार के समान पैना होता है।
उसके पाँव मृत्यु की ओर बढ़ते हैं;
और उसके पग अधोलोक तक पहुँचते हैं।
वह जीवन के मार्ग के विषय विचार नहीं करती;
उसके चाल चलन में चंचलता है, परन्तु उसे वह स्वयं नहीं जानती।
इसलिए अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो,
और मेरी बातों से मुँह न मोड़ो।
ऐसी स्त्री से दूर ही रह,
और उसकी डेवढ़ी के पास भी न जाना;
कहीं ऐसा न हो कि तू अपना यश
औरों के हाथ, और अपना जीवन क्रूर जन के वश में कर दे;
ऐसी स्त्री से दूर ही रह,
और उसकी डेवढ़ी के पास भी न जाना;
कहीं ऐसा न हो कि तू अपना यश
औरों के हाथ, और अपना जीवन क्रूर जन के वश में कर दे;
या पराए तेरी कमाई से अपना पेट भरें,
और परदेशी मनुष्य तेरे परिश्रम का फल अपने घर में रखें;
और तू अपने अन्तिम समय में जब तेरे शरीर का बल खत्म हो जाए तब कराह कर,
तू यह कहेगा "मैंने शिक्षा से कैसा बैर किया,
और डाँटनेवाले का कैसा तिरस्कार किया!
मैंने अपने गुरुओं की बातें न मानीं
और अपने सिखानेवालों की ओर ध्यान न लगाया।
मैं सभा और मण्डली के बीच में पूर्णतः
विनाश की कगार पर जा पड़ा।"
वह तेरे लिए प्रिय हिरनी या सुन्दर सांभरनी के समान हो,
उसके स्तन सर्वदा तुझे सन्तुष्ट रखें,
और उसी का प्रेम नित्य तुझे मोहित करता रहे।
हे मेरे पुत्र, तू व्यभिचारिणी पर क्यों मोहित हो,
और पराई स्त्री को क्यों छाती से लगाए?
उसका घर मृत्यु की ढलान पर है,
और उसकी डगरें मरे हुओं के बीच पहुँचाती हैं;
जो उसके पास जाते हैं, उनमें से कोई भी लौटकर नहीं आता;
और न वे जीवन का मार्ग पाते हैं।
व्यभिचारिणी का मुँह गहरा गड्ढा है;
जिससे यहोवा क्रोधित होता है, वही उसमें गिरता है।
व्यभिचार से बचे रहो। जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्तु व्यभिचार करनेवाला अपनी ही देह के विरुद्ध पाप करता है।
पर मैं कहता हूँ, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिए कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात् व्यभिचार, गंदे काम, लुचपन, मूर्तिपूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म, डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इनके जैसे और-और काम हैं, इनके विषय में मैं तुम को पहले से कह देता हूँ जैसा पहले कह भी चुका हूँ, कि ऐसे-ऐसे काम करनेवाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और विवाह बिछौना निष्कलंक रहे; क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों, और परस्त्रीगामियों का न्याय करेगा।
क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम पवित्र बनो अर्थात् व्यभिचार से बचे रहो, और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपने पात्र को प्राप्त करना जाने। और यह काम अभिलाषा से नहीं, और न अन्यजातियों के समान, जो परमेश्वर को नहीं जानतीं।
हे व्यभिचारिणियों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है? इसलिए जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आपको परमेश्वर का बैरी बनाता है। (1 यूह. 2:15,16)
मैंने उसको मन फिराने के लिये अवसर दिया, पर वह अपने व्यभिचार से मन फिराना नहीं चाहती। देख, मैं उसे रोगशैय्या पर डालता हूँ; और जो उसके साथ व्यभिचार करते हैं यदि वे भी उसके से कामों से मन न फिराएँगे तो उन्हें बड़े क्लेश में डालूँगा।