Pular para o conteúdo
Publicidade

Adultério na Bíblia: o que diz o Antigo Testamento e Jesus

A lei do adultério no Antigo Testamento

A Bíblia define o adultério como a quebra da aliança conjugal por meio de relações íntimas fora do casamento, tratando-o como pecado grave contra o cônjuge e contra Deus. A proibição é expressa no sétimo mandamento entregue a Moisés, tornando a fidelidade no matrimônio um pilar central da lei bíblica.

" ‘अपन परोसी के घरवाली के संग सारीरिक संबंध बनाके अपनआप ला अऊ ओला असुध झन करव।(लैव्य-ब्यवस्था 18:20)

" ‘कहूं कोनो मनखे कोनो आने मनखे के घरवाली संग—अपन परोसी के घरवाली संग बेभिचार करथे, त ओ बेभिचारी अऊ बेभिचारिन दूनों झन मार डारे जावंय।(लैव्य-ब्यवस्था 20:10)

Nos livros de sabedoria, o adultério é descrito como perda completa de juízo moral. A infidelidade destrói a integridade, traz vergonha pública e desfaz a paz familiar de forma irreversível.

का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी ला अपन कोरा म रखे

अऊ ओकर ओनहा ह नइं जरय?

या का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी म रेंगे

अऊ ओकर पांव ह नइं झुलसय?

अइसे ओ मनखे के दसा होथे, जऊन ह आने के घरवाली संग सुतथे;

जऊन ह अइसे माईलोगन ला छूथे, ओह दंड के भागी होही।(नीतिबचन 6:27-29)

जऊन ह बेभिचार करथे, ओकर करा बुद्धि नइं ए;

जऊन ह अइसे करथे, ओह अपनआप ला नास करथे।

ओह मार खाथे अऊ अपमानित होथे,

अऊ ओकर कलंक ह कभू नइं मिटय।

काबरकि जलन ह घरवाला ला बहुंत गुस्सा देवाथे,

अऊ बदला लेवत बेरा ओह दया नइं करय।

ओह नुकसान के भरपई नइं चाहय;

ओला जतका भी घूस दे दव, ओह नइं मानय।(नीतिबचन 6:32-35)

O que Jesus ensinou sobre o adultério

No Sermão do Monte, Jesus aprofunda o entendimento do mandamento: o adultério não se limita ao ato físico consumado, mas nasce no olhar intencional e no desejo alimentado no coração.

"तुमन सुने हवव कि ये कहे गे रिहिस, ‘छिनारी झन करव।’ पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि जऊन कोनो माईलोगन ला खराप नजर ले देखथे, त ओह अपन मन म ओकर संग पहिली ले छिनारी कर चुकिस।(मत्ती 5:27,28)

काबरकि खराप बिचार, हतिया, बेभिचार, छिनारीपन, चोरी, लबारी गवाही अऊ निन्दा—ये जम्मो बात हिरदय ले निकलथे,(मत्ती 15:19)

Jesus também tratou da fidelidade conjugal ao ensinar sobre o divórcio, apontando que o casamento foi desenhado para ser uma aliança permanente e protegida.

पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि जऊन कोनो बेभिचार के छोंड़ कोनो आने कारन ले अपन घरवाली ला छोंड़ देथे, त ओह ओकर छिनारी करे के कारन बनथे, अऊ जऊन ह ओ तियागे गय माईलोगन ले बिहाव करथे, त ओह घलो छिनारी करथे।(मत्ती 5:32)

ओह कहिस, "जऊन कोनो अपन घरवाली ला छोंड़के आने माईलोगन ले बिहाव करथे, त ओह पहिली घरवाली के बिरोध म छिनारी करथे। अऊ कहूं, कोनो माईलोगन ह अपन घरवाला ला छोंड़के आने मनखे ले बिहाव करथे, त ओह घलो छिनारी करथे।"(मरकुस 10:11,12)

"जऊन ह अपन घरवाली ला छोंड़के आने माईलोगन ले बिहाव करथे, ओह छिनारी करथे, अऊ जऊन मनखे एक छोंड़े गे माईलोगन ले बिहाव करथे, ओह छिनारी करथे।(लूका 16:18)

Diante da mulher surpreendida em adultério, Jesus demonstrou tanto a gravidade da lei quanto a extensão do perdão: Ele não minimizou o pecado, mas ofereceu acolhimento e ordenou o abandono daquela prática.

"हे गुरू, ये माईलोगन ह छिनारी करत पकड़े गे हवय। हमर कानून म, मूसा ह हमन ला हुकूम दे हवय कि अइसने माईलोगन ला पथरा फटिक-फटिक के मार डारव। पर तेंह एकर बारे म का कहिथस?" ओमन ये सवाल यीसू ला फंसाय खातिर पुछत रिहिन, ताकि ओमन ला ओकर ऊपर दोस लगाय बर एक बहाना मिल जावय।

पर यीसू ह झुकिस अऊ अपन अंगरी ले भुइयां ऊपर लिखे लगिस। जब ओमन ओकर ले बार-बार पुछे लगिन, त ओह सीधा ठाढ़ होईस अऊ ओमन ला कहिस, "यदि तुमन के बीच म कोनो बिगर पाप के हवय, त ओही ह ओला पहिली पथरा मारय।" अऊ ओह फेर झुकके अपन अंगरी ले भुइयां ऊपर लिखे लगिस।

जब ओमन येला सुनिन, त जम्मो झन बड़े ले लेके छोटे तक, एक-एक करके उहां ले चल दीन। सिरिप यीसू अऊ ओ माईलोगन जऊन ह ओकर आघू म ठाढ़े रहय, उहां रही गीन। तब यीसू ह सीधा ठाढ़ होईस अऊ ओ माईलोगन ले पुछिस, "हे नारी, ओमन कहां गीन? का कोनो तोला दंड नइं दीन?"

ओह कहिस, "हे परभू, कोनो नइं।" तब यीसू ह कहिस, "मेंह घलो तोला दंड नइं देवंव। जा अऊ फेर पाप झन करबे।" ले 8:11 नइं मिलय(यूहन्ना 8:4-11)

Advertências e consequências nas Escrituras

O livro de Provérbios dedica diversos capítulos a advertir sobre o engano do adultério, que promete prazer imediato, mas termina em amargura, perda de honra e destruição espiritual.

खचित ओकर घर ह खाल्हे मिरतू कोति ले जाथे

अऊ ओकर रसता ह मुरदामन के आतमामन करा जाथे।

जऊन मन ओकर करा जाथें, ओमा के कोनो लहुंटके नइं आवंय

या ओमा के कोनो जिनगी के रसता ला नइं पावंय।(नीतिबचन 2:18,19)

काबरकि छिनारी माईलोगन के मुहूं ले गुरतूर बात निकलथे,

अऊ ओकर बात ह तेल ले घलो जादा चिकना होथे;

पर आखिर म, ओह पित्त के सहीं करू,

अऊ दूधारी तलवार सहीं चोख होथे।

ओकर गोड़मन मिरतू कोति जाथें;

अऊ ओकर पांवमन सीधा कबर करा ले जाथें।

ओह जिनगी के रसता के बारे म बिचार नइं करय;

ओह एती-ओती भटकथे, पर ओह ये बात ला नइं जानय।

एकरसेति, हे मोर बेटामन, मोर बात ला सुनव,

अऊ जऊन कुछू मेंह कहिथंव, ओला मानव।

अइसने छिनारी माईलोगन ले दूरिहा रहव,

अऊ ओकर घर के लकठा म घलो झन जावव,

नइं तो तुम्हर मान-सम्मान दूसरमन करा चल दीही

अऊ निरदयी मनखे ह तुम्हर परतिस्ठा ला ले लीही।(नीतिबचन 5:3-9)

अइसने छिनारी माईलोगन ले दूरिहा रहव,

अऊ ओकर घर के लकठा म घलो झन जावव,

नइं तो तुम्हर मान-सम्मान दूसरमन करा चल दीही

अऊ निरदयी मनखे ह तुम्हर परतिस्ठा ला ले लीही।

या अजनबीमन तुम्हर संपत्ति म मजा उड़ाहीं

अऊ तुम्हर मेहनत ह दूसरमन ला धनवान बनाही;

अऊ अपन जिनगी के आखिरी बेरा म,

जब तुम्हर देहें ह कमजोर हो जाही, त तुमन कलहरहू;

अऊ ये कहिहू, "मेंह अनुसासन म काबर नइं रहेंव,

अऊ दूसर के डांट ला काबर तुछ जानेंव!

मेंह अपन गुरूमन के बात ला नइं मानेंव

अऊ अपन सिखोइयामन के बात ला नइं सुनेंव।

मेंह तुरते परमेसर के मनखेमन के सभा म

गंभीर समस्या म रहेंव।"(नीतिबचन 5:8-14)

ओह तोर बर एक मयारू हिरनी, एक सुघर सांबरनी सहीं होवय—

ओकर छाती ह तोला हमेसा खुस रखय,

अऊ तेंह ओकर मया म हमेसा बंधे रह।

हे मोर बेटा, आने मनखे के घरवाली के मया म तेंह काबर मोहित होबे?

अऊ एक छिनार ला अपन छाती ले काबर लगाबे?(नीतिबचन 5:19,20)

छिनारी माईलोगन के मुहूं ह एक गहिरा खंचवा सहीं अय;

ओ मनखे जेकर ले यहोवा ह गुस्सा करथे, ओही ह ओमा गिरथे।(नीतिबचन 22:14)

Nas cartas apostólicas, a orientação à igreja é clara: honrar o casamento, controlar os próprios desejos e fugir das ocasiões de pecado, buscando uma vida guiada pelo Espírito.

येह परमेसर के ईछा ए कि तुमन पबितर बनव—तुमन बेभिचार ले दूर रहव; तुमन ले हर एक मनखे सीखय कि अपन देहें ला कइसने बस म करके, ओला पबितर अऊ आदर के लईक रखे जावय। ये काम मूरती-पूजा करइयामन सहीं काम-वासना ले नइं होवय, जऊन मन परमेसर ला नइं जानंय;(1 थिस्सलुनीके 4:3-5)

एकरसेति छिनारी करई ले दूर रहव। आने जम्मो पाप जऊन ला मनखे ह करथे, ओह ओकर देहें के बाहिर होथे, पर जऊन ह छिनारी करथे, ओह अपन खुद के देहें के बिरोध म पाप करथे।(1 कुरिन्थुस 6:18)

एकरसेति, मेंह कहत हंव कि पबितर आतमा के अगुवई म चलव, त तुमन अपन पापी सुभाव के ईछा ला पूरा करे ले बचे रहिहू। काबरकि पापी सुभाव के ईछा ह पबितर आतमा के बिरोध म होथे, अऊ पबितर आतमा के ईछा ह पापी सुभाव के बिरोध म होथे। येमन एक-दूसर के बिरोधी अंय, ताकि तुमन ओ काम ला झन कर सकव, जऊन ला तुमन करे चाहथव।(गलातिया 5:16,17)

देहें के काममन तो साफ अंय: छिनारी, असुधता, दुराचार, मूरती-पूजा, जादू-टोना, बईरता, झगरा, जलन, कोरोध, सुवारथीपन, फूट, गुटबंदी, डाह, मतवारपन, रंगरेली मनई अऊ ये किसम के आने काम। मेंह तुमन ला चेतावत हवंव, जइसने मेंह पहिली घलो चेताय रहेंव कि जऊन मन ये किसम के काम ला करथें, ओमन परमेसर के राज के भागीदार नइं होवंय।(गलातिया 5:19-21)

बिहाव ह जम्मो मनखे म आदर के बात समझे जावय। बिहाव के बिछौना ह सुध रहय, काबरकि परमेसर ह ओ जम्मो झन के नियाय करही, जऊन मन बेभिचारी अंय अऊ आने के संग गलत संबंध रखथें।(इबरीमन 13:4)

A Bíblia também emprega o adultério em sentido figurado para alertar contra a infidelidade espiritual, quando o coração de quem professa fé se volta para os valores contrários a Deus.

हे छिनारी करइया मनखेमन, का तुमन नइं जानव कि संसार ले मितानी करई के मतलब परमेसर ले बईरता करई ए? जऊन कोनो संसार के संगवारी होय चाहथे, ओह अपनआप ला परमेसर के बईरी बनाथे।(याकूब 4:4)

मेंह ओला अपन पाप ले पछताप करे के मऊका देय हवंव, पर ओह बेभिचार ले पछताप नइं करे चाहथे। एकरसेति, मेंह ओला तकलीफ के खटिया म डालहूं अऊ जऊन मन ओकर संग छिनारी करथें, कहूं ओमन अपन पाप ला छोंड़के पछताप नइं करहीं, त मेंह ओमन ऊपर घोर दुख-तकलीफ डालहूं।(दरसन 2:21,22)

Seja o primeiro

Este artigo te tocou? Faça uma oração!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.