Amor de casal
O amor de casal é celebrado na Bíblia como dom sagrado. O Cântico dos Cânticos exalta a beleza do amor conjugal — íntimo, exclusivo e forte como a morte.
मुझे नगीने के समान अपने हृदय पर लगा रख,
और ताबीज़ की समान अपनी बाँह पर रख;
क्योंकि प्रेम मृत्यु के तुल्य सामर्थी है,
और ईर्ष्या कब्र के समान निर्दयी है।
उसकी ज्वाला अग्नि की दमक है
वरन् परमेश्वर ही की ज्वाला है। (यशा. 49:16)
पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता,
और न महानदों से डूब सकता है।
यदि कोई अपने घर की सारी सम्पत्ति प्रेम के
बदले दे दे तो भी वह अत्यन्त तुच्छ ठहरेगी।
वधू का भाई
हे मेरी बहन, हे मेरी दुल्हन, तूने मेरा मन मोह लिया है,
तूने अपनी आँखों की एक ही चितवन से,
और अपने गले के एक ही हीरे से मेरा हृदय मोह लिया है।
पहला गीत
तू अपने मुँह के चुम्बनों से मुझे चूमे!
क्योंकि तेरा प्रेम दाखमधु से उत्तम है,
तेरे भाँति-भाँति के इत्रों का सुगन्ध उत्तम है,
तेरा नाम उण्डेले हुए इत्र के तुल्य है;
इसलिए कुमारियाँ तुझ से प्रेम रखती हैं
तू सुन्दरी है, हे मेरी प्रिय, तू सुन्दरी है;
तेरी आँखें कबूतरी की सी हैं।
वधू
हे मेरे प्रिय तू सुन्दर और मनभावना है
और हमारा बिछौना भी हरा है;
फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, "आदम का अकेला रहना अच्छा नहींआदम का अकेला रहना अच्छा नहीं: परमेश्वर ने मनुष्य को समाजिक प्राणी बनाया, कि वह न केवल अपने से बड़ो के साथ बातचीत करे बल्कि समान लोगों के साथ भी करे। उसे एक साथी चाहिए था जिसके साथ वह बातचीत कर सके और परमेश्वर ने उसकी इस जरूरत की पूर्ति करने का निर्णय किया।; मैं उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊँगा जो उसके लिये उपयुक्त होगा।" (1 कुरि. 11:9)
और यहोवा परमेश्वर ने उस पसली को जो उसने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया। (1 तीमु. 2:13) तब आदम ने कहा, "अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे माँस में का माँस है; इसलिए इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।" इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक ही तन बने रहेंगे। (मत्ती 19:5, मर. 10:7,8, इफि. 5:31)
जिसने स्त्री ब्याह ली, उसने उत्तम पदार्थ पाया,
और यहोवा का अनुग्रह उस पर हुआ है।
तेरा सोता धन्य रहे; और अपनी जवानी की पत्नी के साथ आनन्दित रह,
वह तेरे लिए प्रिय हिरनी या सुन्दर सांभरनी के समान हो,
उसके स्तन सर्वदा तुझे सन्तुष्ट रखें,
और उसी का प्रेम नित्य तुझे मोहित करता रहे।
हे मेरे पुत्र, तू व्यभिचारिणी पर क्यों मोहित हो,
और पराई स्त्री को क्यों छाती से लगाए?
अतः वे अब दो नहीं, परन्तु एक तन हैं इसलिए जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे।"
प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। अशोभनीय व्यवहार नहीं करता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुँझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों पर विश्वास करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। (1 कुरि. 13:4)
इसी प्रकार उचित है, कि पति अपनी-अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे, जो अपनी पत्नी से प्रेम रखता है, वह अपने आप से प्रेम रखता है। क्योंकि किसी ने कभी अपने शरीर से बैर नहीं रखा वरन् उसका पालन-पोषण करता है, जैसा मसीह भी कलीसिया के साथ करता है।
पर तुम में से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्नी भी अपने पति का भय माने।
और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कमरबन्ध है बाँध लो।
मित्र का मूल्य
एक से दो अच्छे हैंएक से दो अच्छे हैं: साथी के बिना मनुष्य ऐसा है जैसा दाहिने हाथ के बिना बायाँ हाथ। , क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो। फिर यदि दो जन एक संग सोएँ तो वे गर्म रहेंगे, परन्तु कोई अकेला कैसे गर्म हो सकता है? यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका सामना कर सकेंगे। जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती।
क्या उसने एक ही को नहीं बनाया जबकि और आत्माएँ उसके पास थीं? और एक ही को क्यों बनाया? इसलिए कि वह परमेश्वर के योग्य सन्तान चाहता है। इसलिए तुम अपनी आत्मा के विषय में चौकस रहो, और तुम में से कोई अपनी जवानी की स्त्री से विश्वासघात न करे।
विभिन्न नियम
"जिस पुरुष का हाल ही में विवाह हुआ हो, वह सेना के साथ न जाए और न किसी काम का भार उस पर डाला जाए; वह वर्ष भर अपने घर में स्वतंत्रता से रहकर अपनी ब्याही हुई स्त्री को प्रसन्न करता रहे।