Dívidas
As dívidas podem escravizar, mas a Bíblia nos ensina princípios de sabedoria financeira: não se endividar imprudentemente, pagar o que se deve e confiar em Deus como provedor.
O devedor é servo do credor
O rico domina sobre o pobre, e o que toma emprestado é servo do que empresta. A Bíblia convida à liberdade financeira.
धनी मनुष्य निर्धन लोगों पर प्रभुता करता है,
और उधार लेनेवाला उधार देनेवाले का दास हो जाता है।
यदि तुझमें शक्ति हो तो जिनका भला करना चाहिए,
उनका भला करने से न रुकना।
छल से कमाया गया धन घटता जाता है,
पर परिश्रम करके जमा किया गया धन बढ़ता जाता है।
"कोई भी दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता; क्योंकि वह या तो एक से घृणा करेगा और दूसरे से प्रेम रखेगा, या एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।
Princípios financeiros
Pagai a todos o que lhes é devido. Deus promete que o justo não será desamparado e que a bênção virá sobre os obedientes.
जिसका तुम्हें कुछ चुकाना है उसे चुकाओ : जिसे कर चुकाना है उसे कर चुकाओ, जिसे चुंगी देनी है उसे चुंगी दो, जिससे डरना है उससे डरो, जिसका आदर करना है उसका आदर करो।
आपस के प्रेम को छोड़ किसी बात में किसी के ऋणी न बनो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है उसने व्यवस्था को पूरा किया है।
दुष्ट ऋण लेता है, और चुकाता नहीं,
परंतु धर्मी उदारता से दान देता है;
"क्योंकि तुममें से कौन है जो बुर्ज बनाना चाहता है और पहले बैठकर खर्च का हिसाब नहीं करता, कि पूरा करने के लिए पर्याप्त धन है या नहीं?
प्रत्येक जो तुझसे माँगे, उसे दे, और जो तेरी वस्तुएँ छीने, उससे वापस मत माँग।
और जिस प्रकार हमने अपने अपराधियों को क्षमा किया है,
वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।
Contentamento
Seja o vosso viver sem ganância, contentando-vos com o que tendes. O Senhor é suficiente — não nos desamparará.
तुम्हारा जीवन लोभ-रहित हो और जो तुम्हारे पास है उसमें संतुष्ट रहो। उसने स्वयं कहा है : मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी त्यागूँगा।