Domínio próprio
O domínio próprio é fruto do Espírito e marca de maturidade espiritual. A Bíblia ensina que quem governa o próprio espírito é melhor do que quem conquista uma cidade.
Fruto do Espírito
O fruto do Espírito inclui domínio próprio. A graça de Deus nos ensina a viver de maneira sóbria e justa neste mundo.
पर आत्मा को फल प्रेम, खुसी, सान्ति, सबर, किरपा, भलाई, भरोसा, भोलो पन नमरता, अऊर संयम हैं असा-असा काम हुन को बदला विरोध म कोई भी नेम नी हाय।
काहेकि परमेस्वर कि वा दया परघट हैं, जो सब अदमी हुन को उद्धार को कारन आय, अर हमका जतावा हैं कि हम अभक्ति अर दुनिया की इच्छा से मन ख फेर ख या दुनिया म धीरज अर धरम अऊर नेक पन से जीवन बिताँय; अर वा भलो आसा कि एकोमतलब अपनो महान परमेस्वर अर उध्दार करन वालो यीसु मसी की सक्ति को परघट होन कि रस्ता देखते रैय।
काहेकि परमेस्वर न हमेय भय की नी पर सक्ति अर प्रेम अर संयम की आत्मा दी हैं।
एको लाने तुम सब तरीका को कोसिस कर ख अपनो विस्वास पर सद्गुन, अर सद्गुन पर समझ, अर समझ पर सहन कि सक्ति, अर सहन कि सक्ति, अर धीरज पर भक्ति, अर भक्ति पर भई चारा कि इच्छा पर प्रेम बढ़ते जा।
Governar a si mesmo
Melhor é o que domina o seu espírito do que o que toma uma cidade. A cidade sem muros é o homem sem domínio próprio.
का तुम नी जाना की दऊड म तो दऊडा सब ही हैं, पर इनाम एक ही ले जावा हैं? तुम वसो ही दऊडो की जीते। सब प्रतियोगी हर बात म संयम रखह हैं। वी मुरझान वालो मुकुट पावन को लाने असो करह हैं, जब कि हम अविनासी मुकुट को लाने। एकोलाने म ते यू इच्छा से दऊड हूँ, पर इच्छा ही से नी; म भी यी इच्छा से मुकूट हुन से लूड़ हूँ, पर ओखा सामने नी जो हवा पीट हैं हुई लड़ हैं। अदि म अपनी सरीर ख मार कूट अऊर बस म लाऊ हैं, असो नी होय कि उ दूसरा ख प्रचार करन म स्वंय ही कोई रिती से बेकार हो।
अगर यदि वी स्वंय नी कर सके, ते सादी करे: काहेकि सादी करूँ कामातुर रहनु से चोक्खो हैं।
तुम कई असी परीक्छा म नी पड़ो, जो अदमी ख सहन से बाहर हैं। परमेस्वर विस्वास लायक हैं अऊर उ तुम ख सक्ति से बाहर परीक्छा म नी पड़न दे, पर परीक्छा का संग निकास भी करे कि तुम, सहन सके।
Disciplina e vigilância
Sede sóbrios e vigilantes. O diabo anda em derredor como leão rugidor. A sobriedade nos protege e fortalece.
होसियार हो, अर जागते रह; काहेकि तुमारो बुरी करन वालो सैतान गर्जन वालो सेर को जसो यू खोज म रह हैं कि कोई ख कब फाड़ खाऐ। विस्वास म पक्को होय ख, अर यू जान ख ओको संग लड़ाई कर कि तुमारो भई जो दुनिया म हैं असो ही दुख सहन करिये हैं।
सारी बात हुन ख आखरी हैं पर होन वालो हैं; एकोलाने गंभीर होय ख विनती का लाने हुसयार रह।
एकोलाने जब कि मसी न आँग म हो ख दुख उठायो ते तुम भी वही इच्छा को अवजार ख जसो धारण करियो हैं, काहेकि जे न सरीर म दुख उठायो उ पाप से छुट गयो हैं, काहेकि आवन वालो (भविस्य) टेमं म अपनो बचो हुओ सारीरिक जिन्दगी अदमी हुन कि लोभ हुन का अनुसार नी पर परमेस्वर कि इच्छा को हिसाब से बिताया कर। काहेकि दुसरी जात हुन कि इच्छा को हिसाब से काम करन, अर लुचपन कि बुरी लोभ हुन, दारू पीवन वालो, लीलाक्रीड़ा, पियक्कड़ पन, अर बुरो काम म मूर्ति पूजा म जहाँ लक हम न पहले बखत गँवाया उही ढ़ेर भयो। ऐ से वी गजब करिये हैं कि तुम असो भारी लुचपन म उनको संग नी देव हैं, अर एकोलाने वी बुरो अच्छो कह हैं; पर वी ओ ख जे जिन्दो हुन अर मरो भयो ख न्याव करन ख तैयार हैं, हिसाब दे हे।
अर तुम म से हर एक इंसान धीरज धर ख अपनो सरीर ख सुध्दता बना ख रखो अर ओकी इज्जत करो। अर यू काम मर्जी से नी, अर न वा जात को समान जो परमेस्वर ख नी जाना,
O senhorio de Cristo
Todo domínio pertence a Cristo. Ele é Senhor dos senhores e Rei dos reis — e nos capacita a viver em santidade.
मी न रात म सपना म देखा, अऊर देख्यो, इंसान को पोरिया-जसो कोई आकास को बादल हुन समेत आ रयो हतो, अऊर वी, ऊ अति पुरानो को जोने पहुँचियो, अऊर ओ ख ऊ ओको नजिक लायो है। तब ओ ख असो हक, महिमा अऊर राज्य दियो गयो, कि अऊर राज्य-राज्य को इंसान अऊर अगल-अगल कुल को अऊर अगल-अगल भासा बोलनवाला हुन सब ओको अधीन हो; ओको हक सदा लक अटल, अऊर ओ को राज्य अविनासी ठैरा।
मो ख यू अच्छो लगा, कि परमप्रधान परमेस्वर न मो ख जे जे चिखान अऊर चमत्कार दिखायो है, उन ख परगट करू। ओको दिखायो हुयो चिखान का ही बड़ो, अऊर ओको चमत्कार हुन म का ही बड़ो सक्ति परघट होवा है! ओको राज्य ते सदा को अऊर ओको हक खानदान से खानदान लक बनी रहवा है।
परमेस्वर हमे अन्धकार ख अधीनता से निकल ख अपनो प्यारो पोरिया को राज्य म छुड़ा ले आयो। युही पोरिया दुवारा ही हम ख छुटकारा मिल्यो हैं याने कि हम ख मिले हैं हमारो पाप हुन कि छमा।
परमेस्वर ने मसी म अपनी सक्ति ख तब दिखायो, जब ओ ना मूर्दा म से यीसु ख जिन्दो कर ख दिखायो अऊर स्वर्ग म अपनी जेवनो बाजू बिठायों। परमेस्वर न ओखा सब तरीका का प्रधानता अर अधिकार हुन, सक्ति हुन, अर प्रभुता को प्रभु को ऊप्पर सासन करा हैं; अर हर एक नाम को उप्पर, जो न सिरप यू लोक म पर आन वालो लोक म भी लियो जाहे, बिठायो;
पर हमारी स्वदेस स्वर्ग पर हैं; अर हम एक उध्दार कर्ता प्रभु यीसु मसी को वहा से आवन कि बाट जोतू रवह हैं। उ अपनी सक्ति को ओ पर प्रभाव को अनुसार जेको व्दारा उ सब चीज हुन ख अपनो बस म रख हैं, हमारी दीन हीन सरीर को रूप बदल ख, अपनी महिमा कि सरीर को अनुकूल बना दे हे।
काहेकि यी जाना हैं कि मसी मर हुओ म जिन्दो उठ ख फिर मरन ख नी; ओ पर फिर माऊत कि प्रभुता नी होन की।
अर जे सारीरिक मजबूरी म हैं, वी परमेस्वर ख खुसी नी कर सक हैं।
पर जब कि परमेस्वर को आत्मा तुम म बसो हैं, ते तुम सारीरिक मजबूरी म नी पर आत्मिक मजबूरी म होव। अदि कोई म मसी को आत्मा नी ते उ ओ ख जान नी।
अऊर जसो आदम म सब मर हैं, असो ही मसी म सब जिन्दो कियो जाहे, पर हर एक अपनी बाड़ी म से: पहलो फसल मसी का पास ला, फिर मसी को आवान पर ओको लोग। एका बाद अन्त भयो। उ बखत उ सारी अधिकार, अर सारो हक, अर सक्ति को अन्त कर ख राज को परमेस्वर बाप का हात म दियो गयो। काहेकि जब तक उ अपनो दुसमन हुन क अपनो पाय हुन का नीच नी ले आऊ तब तक ओ ख राज करनु जरूरी हैं।