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Domínio próprio

Por Bíblia Online

O domínio próprio é fruto do Espírito e marca de maturidade espiritual. A Bíblia ensina que quem governa o próprio espírito é melhor do que quem conquista uma cidade.

Fruto do Espírito

O fruto do Espírito inclui domínio próprio. A graça de Deus nos ensina a viver de maneira sóbria e justa neste mundo.

पण आत्‌; ोंकरवा, ा, ांगम ा, अनदयकरवा, भलकरवा, भरहो; ़ुा, अनहक खवा; आवा-आवयदहय

आखणहभगवदयउजन्‌े। अनआऩाे-़ाआपणआहय़ी़े, आपणभक्‌करत्‌अनआहयकळलच मन रवआञ़ीअनभगव्‌े। अनहयआह अनआपणखत भगवअनटकआपण्‌ईसमसबड़ाउजन्‌हयववतो।

भगवआपणआत्‌ी, पण खत, अनों, अनगम आत्‌आपले।

एतरतमआख्‌्‌कर, तमभरहरल़ो अनरल्‌े। अन्‌गम अनगम रज अनरज भक्‌ी। अनभक्‌य-ब्‌ों, अनय-ब्‌ोंवदो।

Governar a si mesmo

Melhor é o que domina o seu espírito do que o que toma uma cidade. A cidade sem muros é o homem sem domínio próprio.

दवड़ीईलकवईलकवकरआखदवड़े; पण ईलएकजणकरे। तमईसम दवड़ो ईलकरो। लवआखयदलवपड़े। ईलकरन्‌्‌यवगड़ी करवकरईसम करे। पण आमहयगड़ी कदे। आहयईलकरवकरींदवड़ु। हळअमथपण हनत करहक ु। खर ्‌ईसम हयवे, परच्‌करकळु।

पण सवसकर्‌वगर े, मनकर े; हय्‌बणवकर े।

तमआसवरख पड़्‌ा, णहसके: भगवभरहकरएवे: हयतमनएवरख पडअनकदतमएवरख पड़ी ो, हयतमनहयरख े। आनकरततमहयरख सको।

Disciplina e vigilância

Sede sóbrios e vigilantes. O diabo anda em derredor como leão rugidor. A sobriedade nos protege e fortalece.

ो, अनमळो; तमतड़ो रवहर आहय़ोयऩीभरहमजबहय्‌, अनआहयमनकरकळआसममस्‌ा।

भगवबड़ा

आखटवे, आनचळहय्‌्‌ो।

बदल्‌

आनकरतमसहय्‌्‌तमहयहत्‌धर ो, ्‌हय्‌ो। तम, लच पण भगवमरजअनस्‌े। आड्‌करवहतहता, अन्‌लच, करवा, ु, लथ-पथ ा, अन्‌करवउदड़ेगमएतरघणु। आनहयवहरकरतमएव्‌मना, अनआनकरतहयतममबद्‌करे। पण हयवत्‌अनमरलकरवआपवपडे।

अनतम्‌आखआहखलपणअनईज्‌जत ्‌े। अनआहयलच ी, अनहयआड्‌भगवे,

O senhorio de Cristo

Todo domínio pertence a Cristo. Ele é Senhor dos senhores e Rei dos reis — e nos capacita a viver em santidade.

ें दरसन ्‌ो, अनआहय्‌रग दळआव्‌्‌हतु, अनहयहय्‌ां ्‌ु, अनहय़ाा। तत्‌एवहक, बड़ाअन्‌आप्‌ा, स-दअन्‌य-र्‌णहअनअलग-अलग लवआखहक हये; कदखत्‌तम हयव्‌्‌ु।

मनआहय्‌ु, आख्‌भगवमनअनचमत्‌े, मनउजन्‌करु। तरी, अनचमत्‌तरसक्‌उजन्‌हये! ्‌सदअनज-प़ी ़ी तक बण

हयआमरलकब्‌आहों्‌कल्‌ो, आमनटकमतलब जडे।

हयमसकर्‌मरल़ीरग जमण़ो बह्‌ो। मसआखरग ी, हकद्‌ा, खत, अनयलकरे; ्‌आहयकळपण आव्‌कळे।

पण आपणरग े, ां आपण़ा्‌ईसमसआव्‌अनआम्‌ा। हयआपणखत अनसआखआहकब्‌करन्‌े, आपणकमजबदल, आहबड़ाभरलबदले।

आहयणयमसमरलवतहय्‌मरवी; हक

अनलत े, हयभगवकर सके।

पण जत्‌भगवआत्‌तमबहे, तमलत पण आत्‌लत े। कदमसआत्‌हय, हयमसहय

सम आदम आखमर ्‌ा, ईसमसआखमर्‌ा-्‌वतहय्‌बठहय जहे। पण आख्‌े-्‌मर्‌ा-्‌वतहय्‌बठहयहे। आखमसी, अळतमसरगआवहभरहकरन्‌णहमर्‌ा-्‌बठहय जहे। अळतकळ खत्‌तम हयवआखरआय गहे; हयमसआखकरन्‌े, हक खण्‌े, अनआखखत्‌तम कर े। अनआखज-पभगव़ोे। पण जत्‌लग मसआहआहतळआवां लग करवजऱी े।

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