Sermos imitadores de Cristo
Ser imitador de Cristo é o chamado supremo do cristão. Paulo exortou: 'Sede meus imitadores, como eu sou de Cristo.' Fomos criados à imagem de Deus para refletir seu caráter.
Imitar a Cristo
Sede imitadores de Deus como filhos amados. Cristo se esvaziou e se humilhou — esse é o padrão que devemos seguir.
उजेरो कि अवलाद बनो
एकोलाने प्यारो पोरिया-पारी को जसो परमेस्वर को हिसाब से चलो,
जसो मसी यीसु को स्वभाव हतो वसो ही तुमारो भी स्वभाव हो;
जे न परमेस्वर को स्वरूप म हो ख भी परमेस्वर को तुल्य होन ख
अपनो बस म रख कि चीज नी समझ।
याने अपनो तुम ख असो सून्य कर दियो,
अर दास को स्वरूप धारण कियो,
अर अदमी का समान म हो ख गयो।
अर अदमी को रूप म प्ररगट हो ख अपनो तुम ख दीन करियो,
अर यहाँ तक कि आदेस मानन ते रय्हो कि मरन हाव, सूली कि मरन भी सहन कर लियो।
तुम ख मोरी जसी चाल चल हैं जसो म मसी कि जसी चाल चलू हैं।
तुम न हमरो अर प्रभु को जसो पालन करियो अर बड़ी दुख मुसीबत को भोग ख सुध्द आत्मा कि मरजी से खुसी से सुसमाचार ख मान लियो।
Criados à imagem de Deus
Deus nos criou à sua imagem e semelhança. Adorar em espírito e verdade é viver refletindo o caráter do Criador.
फिर परमेस्वर न बोल्यो, "हम इंसान का खुद को रूप को हिसाब से खुद को समान बनाहे; अऊर वी समुंदर की मच्छी, अर बददल म की चिड़िया हुन, अर घर म पालन वाला जानवर, अर पुरी जमीन पा अर सब रेंगन वाला जीव जन्तु हुन पा जो जमीन म रेंगा है, हक रखे।"
काहेकि परमेस्वर आत्मा हैं, "यू जरूरी हैं कि ओकी भक्ति करन वाला आत्मा से अर सच्चई से बिनती करे।"