Mulher
A Bíblia celebra a mulher como obra-prima da criação divina. Ela é elogiada por sua sabedoria, força, beleza interior e papel fundamental na família e na sociedade.
A mulher na criação
Deus criou o homem e a mulher à sua imagem. A mulher foi formada como ajudadora idônea — parceira de igual dignidade e valor.
तौ परमेस्वर अपने स्वरूप इंसान जाति कै बनाई, और परमेस्वर के स्वरूप मैं बौ इंसान कै बनाई, परमेस्वर उनकै नर और नारी के रूप मैं बनाई।
तौ प्रभु परमेस्वर बौ आदमी कै गहरी नींद मैं सुबाए दई, और जब बौ आदमी सोत रहै, तौ परमेस्वर बौ आदमी की एक पुसरिया निकारी और बाकी जघा मैं बामैं माँस भर दई। प्रभु परमेस्वर बौ पुसरिया से जो बौ आदमी से निकारी रहै, बासे एक बईय्यर बनाई; और बौ बाके झोने लै आई। फिर बौ आदमी कहथै,
"आखिरकार, जौ मेरिये तराहनी है -
जौ मेरी हड्डी मैं की हड्डी है, और मेरे माँस मैं को माँस है,
और जहे बजे से जाको नाओं ‘बईय्यर’ होगो, काहैकि जाकै लोग मैं से निकारो गौ है।"
Virtude e caráter
A beleza é vã e a formosura passageira, mas a mulher que teme ao Senhor é digna de louvor. Seu caráter é seu maior tesouro.
Sabedoria e serviço
As mulheres da Bíblia foram líderes, profetisas e discípulas fiéis. Jesus honrou as mulheres e as incluiu em seu ministério.
जाके बाद ईसु सहर-सहर और गाँव-गाँव परमेस्वर के राज्य को सुसमाचार प्रचार करत भइ, फिरन लगो, और बारह चेला बाके संग रहैं, और थोड़ी बईंय्यरैं रहैं जो प्रेत आत्मा से और बिमारिन से अच्छी भइ रहैं, और बे जे रहैं, मरियम जो मगदलीनी कही जात रहै, जोके भीतर से सात प्रेत आत्मा निकरी रहैं, योअन्ना, जोको आदमी खोजा हेरोद के दरबार मैं एक अधिकारी रहै; और सुसन्नाह, और भौत सी बईंय्यरैं, जो ईसु और बाके प्रेरितन कि मदत करन के ताहीं अपने खुद की सम्पत्ति से उनकी सेवा करत रहैं।
बैसिये, तुमकै बईंय्यरौं अपने लोगा के अधिकार कै अपनानो चाहिए। फिर, भलेई कुछ लोग सुसमाचार कै मानन से इंकार कर दियैं, लेकिन तुमरी परमेस्वर कै मानन बारी जिंदगी बिना कोई सब्द के बासे बात करैगो। उनके ऊपर जीत हासिल करी जागी और बे विस्वासी बनंगे,
बैसिये तुम लोगन कै अपनी बईंय्यरन के संग ठीक समझ के संग रहनो चाहिए कि बे तुमसे नाजुक हैं। उनके संग आदर से पेस आबौ, काहैकि बे भी, तुमरे संग, जिंदगी को परमेस्वर को वरदान लेमंगी। ऐसो करौ कि तुमरी प्रार्थना मैं कछुए बाधा न पड़ै।
उनकी बईंय्यरैं भी अच्छी चरित्र और भरोसा के काबिल होनी चाहिए और एक दुसरेन की निंदा करन बारी न होनो चाहिए; उनकै हर चीज मैं सांत और इमानदार होनो चाहिए।
ऐसिये बुर्जुग बईंय्यरन कै सिखा कि बेऊँ पवित्र जिंदगी जीमैं। बे ना तौ एक दुसरेन की निंदा करन बारी और ना दाखरस की गुलाम होमैं। पर बे अच्छी बात सिखान बारी होमैं, जोसे बे ज्वान बईंय्यरन कै आग्या दियैं कि बे अपने लोगा और बालकन से प्रेम करैं, बे अपने बलबूते खड़ी और सुद्ध, घर को काम-काज करन बारी, भली और अपने लोगा के अधीन रहन बारी होमैं, ताकी कोई भी परमेस्वर के बचन की बुराई ना होबै।