Pular para o conteúdo
Publicidade

Mundo: os três sentidos da palavra na Bíblia

Os três sentidos da palavra mundo na Bíblia

Na Bíblia, a palavra "mundo" tem três sentidos principais: a criação física de Deus, a humanidade e o sistema corrompido pelo pecado que opera contra o Criador. Compreender essa distinção resolve a aparente contradição entre Deus amar o mundo e ordenar que o cristão não ame o mundo.

Primeiro, o mundo é o universo físico criado por Deus e sustentado por Ele:

धरती अर जो किमे उस म्ह सै यहोवा का ए सै;

दुनिया अर उस म्ह रहण आळे भी।

क्यूँके उस्से नै उसकी नींव समुन्दरां कै उप्पर मजबूत करकै धरी,

अर बड़ी-बड़ी नदियाँ कै उप्पर स्थिर करया सै।(भजन संहिता 24:1,2)

Segundo, o mundo representa as pessoas — a humanidade caída e frágil, que Deus ama e deseja resgatar:

क्यूँके परमेसवर नै दुनिया के माणसां तै इसा प्यार राख्या के उसनै अपणा इकलौता बेट्टा दे दिया, ताके जो कोए उसपै बिश्वास करै, वो नाश कोनी होवै, पर अनन्त जीवन पावै।(यूहन्‍ना 3:16)

Terceiro, o mundo refere-se à ordem moral rebelde contra Deus, governada pelo pecado e sob influência maligna:

हम जाणा सां, के हम परमेसवर तै सां, अर सारी दुनिया उस शैतान कै बस म्ह पड़ी सै।(1 यूहन्‍ना 5:19)

Por que a Bíblia adverte contra o amor ao mundo

Quando o apóstolo João adverte contra o amor ao mundo, o texto bíblico não condena a criação nem o amor ao próximo. O alerta combate a submissão aos valores de um sistema independente de Deus, caracterizado pela cobiça e pela soberba:

थम ना तो दुनिया तै अर ना दुनियावी चिज्जां तै प्यार राक्खो। जै कोए दुनिया तै प्यार राक्खै सै, तो उस म्ह पिता परमेसवर का प्यार कोन्या। क्यूँके जो किमे दुनिया म्ह सै, यानी देह की अभिलाषा, आँखां की अभिलाषा अर रोजी रोट्टी का घमण्ड, वो पिता परमेसवर की ओड़ तै कोनी पर दुनिया की ए ओड़ तै सै।(1 यूहन्‍ना 2:15,16)

दुनिया अर उसकी अभिलाषा दोनु मिटते ज्या सै, पर जो परमेसवर की मर्जी पै चाल्‍लै सै वो सदा बण्या रहवैगा।(1 यूहन्‍ना 2:17)

Tiago usa uma linguagem igualmente firme para lembrar que adotar as prioridades desse sistema hostil coloca a pessoa em rota de colisão com a vontade divina:

हे बेईमान माणसों, के थम न्ही जाणते, दुनिया की चिज्जां तै प्यार करणा, परमेसवर तै बैर करणा सै। इस करकै जो कोए संसार का साथी बणणा चाहवै सै, वो अपणे-आपनै परमेसवर का बैरी बणावै सै।(याकूब 4:4)

No mundo, mas sem ser do mundo

Jesus não pediu a Deus que retirasse os Seus discípulos da convivência na sociedade, mas que os guardasse do mal. A fé bíblica não promove o isolamento da cultura, e sim a lealdade a Deus em meio às pressões diárias:

मै या बिनती कोनी करदा के उननै तू दुनिया तै लिकाड़ ले, बल्के तू उननै उस शैतान तै बचाए राख। जिस तरियां मै दुनिया का कोनी, उस्से तरियां वे भी दुनिया के कोनी। तेरा वचन सच्‍चा सै, सच कै जरिये तू उननै अलग करण खात्तर समर्पित कर। जिस तरियां तन्‍नै मेरै ताहीं दुनिया म्ह भेज्या, उस्से तरियां मन्‍नै भी उन ताहीं दुनिया म्ह भेज्या,(यूहन्‍ना 17:15-18)

"जै दुनिया के माणस थारैतै बैर राक्खै सै, तो जाण ल्यो के उसनै थारैतै पैहल्या मेरै तै बैर राख्या सै। जै थम दुनिया के माणसां जिसे होन्दे, तो दुनिया थारे तै आपण्यां जिसा प्यार करदी, पर थम दुनिया के कोनी, बल्के मन्‍नै थारैताहीं दुनिया म्ह तै छाँट लिया सै, इस करकै दुनिया के माणस थारे तै बैर राक्खै सै।(यूहन्‍ना 15:18,19)

O apóstolo Paulo mostra o caminho prático para essa caminhada: não se moldar aos padrões do presente século, buscando uma mente renovada para reconhecer e viver a vontade de Deus:

इस दुनिया के माणसां बरगे ना बणो, पर परमेसवर थारी सोच नै बदलै, अर थारा चाल-चलण भी बदलता जावै, जिसतै थम परमेसवर की भली, अर आच्छी लागण आळी, अर सिध्द इच्छा अनुभव तै बेरा पाड़ सको।(रोमियों 12:2)

म्हारे पिता परमेसवर की नजर म्ह सच्‍ची अर शुद्ध भगति या सै, के अनाथ्थां अर विधवाया के क्ळेश म्ह उसकी सुधि ले, अर अपणे-आपनै दुनिया तै बेदाग राक्खै।(याकूब 1:27)

परमेसवर नै अपणा अनुग्रह इस बात म्ह जाहिर करया के उसनै मसीह यीशु ताहीं म्हारा उद्धारकर्ता बणाकै भेज दिया, ताके हरेक माणस बचाए जा सकै। अपणी दया के कारण परमेसवर म्हारे ताहीं सिखावै सै, के हम उन तरिक्‍कां तै बरताव करणा बन्द कर द्या, जो उस ताहीं खुश न्ही कर सकदे, अर इसी लालसा ना राक्खा जिसी अबिश्वासी लोग राक्खै सै, पर बुध्दिमानी अर धार्मिकता तै बरताव करां, अर इसा बरताव करा जो परमेसवर नै पसन्द हो, जिब तक हम दुनिया म्ह रहवां।(तीतुस 2:11,12)

Sal da terra e luz do mundo

Em vez de fugir do convívio ou assimilar os vícios do ambiente, o cristão é chamado a agir com integridade, influenciando positivamente as pessoas e anunciando as boas-novas:

"थम धरती पै लोग्गां खात्तर नूण की तरियां सों, पर जै नूण का सुवाद जान्दा रहवै, तो वो किस चीज तै नमकीन करया जावैगा? फेर वो किसे काम का न्ही, सिर्फ इसकै के बाहर फेक्या ज्या अर माणसां के पैरां तळै चिकल्या ज्या।"

"थम दुनिया के लोग्गां खात्तर चाँदणा की तरियां सों। जो नगर पहाड़ पै बस रह्या सै वो लुह्क न्ही सकदा।(मत्ती 5:13,14)

अर यीशु नै उनतै कह्या, "थम सारी दुनिया म्ह जाकै सारी सृष्टि के माणसां ताहीं सुसमाचार प्रचार करो।(मरकुस 16:15)

Jesus confronta a ambição humana ao lembrar que a conquista de todas as vantagens terrenas perde o valor se a integridade da alma for abandonada:

जै माणस सारी दुनिया नै पा लेवै, अर अपणी जान का नुकसान ठावै, तो उसनै के फायदा होगा? या माणस अपणी जान कै बदले के देवैगा?(मत्ती 16:26)

A vitória sobre o sistema do mundo

A Bíblia não promete imunidade a conflitos e pressões externas. A segurança de quem crê repousa na vitória consumada por Jesus Cristo sobre todas as forças de oposição:

"मन्‍नै ये बात थारैतै ज्यांतै कही सै, के थम मेरै म्ह शान्ति पाओ। दुनिया म्ह थारे पै क्ळेश होवै सै, पर हिम्मत राखियो, मन्‍नै दुनिया ताहीं जीत लिया सै।"(यूहन्‍ना 16:33)

क्यूँके जो परमेसवर पिता की औलाद सै, उसनै दुनिया पै जीत हासिल करी सै; अर वा जीत दुनिया ताहीं हरा देवै सै, वो म्हारा बिश्वास ए सै।(1 यूहन्‍ना 5:4)

हे प्यारे बाळकों, थम परमेसवर के लोग सों, अर थमनै झूठ्ठे नबियाँ पै जीत पाई सै; क्यूँके पवित्र आत्मा जो थारे म्ह बसै सै, वो शैतान तै बड्ड़ा सै, जो इस दुनिया म्ह सै।(1 यूहन्‍ना 4:4)

A resposta contra as ideologias vazias e os enganos do mundo depende do discernimento e das defesas espirituais que Deus concede:

इस कारण हम मानवीय शिक्षा का पालन न्ही करणा चाहन्दे, ताके कोए थमनै उस बेकार ज्ञान अर धोक्खे कै जरिये अपणे बस म्ह ना करले, जो माणसां के रिवाज अर दुनियावी शिक्षा के मुताबिक तो सै, पर मसीह के मुताबिक कोनी।(कुलुस्सियों 2:8)

क्यूँके म्हारा यो आत्मिक युद्ध माणसां तै कोनी, पर प्रधानां, अधिकारियां, अर इस संसार के अन्धकार के हाकिमां अर दुष्टता की आत्मिक सेनाओं तै सै, जो अकास म्ह सै।(इफिसियों 6:12)

Seja o primeiro

Este artigo te tocou? Faça uma oração!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.