Ouvir
Ouvir é uma disciplina espiritual essencial. A Bíblia exorta: 'Quem tem ouvidos, ouça.' A fé vem pelo ouvir, e ouvir é mais que escutar — é obedecer e agir.
A fé vem pelo ouvir
Sem ouvir a Palavra, não há fé. A pregação do evangelho gera fé nos corações de quem ouve com disposição e humildade.
इसलिये स्पष्ट है कि विश्वास की उत्पत्ति होती है सुनने के माध्यम से तथा सुनना मसीह के वचन के माध्यम से.
इसलिये स्पष्ट है कि विश्वास की उत्पत्ति होती है सुनने के माध्यम से तथा सुनना मसीह के वचन के माध्यम से.
वे भला उन्हें कैसे पुकारेंगे जिनमें उन्होंने विश्वास ही नहीं किया? वे भला उनमें विश्वास कैसे करेंगे, जिन्हें उन्होंने सुना ही नहीं? और वे भला सुनेंगे कैसे यदि उनकी उद्घोषणा करनेवाला नहीं?
जिसके सुनने के कान हों, वह सुन ले."
उनकी इसी स्थिति के विषय में भविष्यवक्ता यशायाह की यह भविष्यवाणी पूरी हो रही है:
" ‘तुम सुनते तो रहोगे किंतु समझोगे नहीं;
तुम देखते तो रहोगे किंतु तुम्हें कोई ज्ञान न होगा;
क्योंकि इन लोगों का मन-मस्तिष्क मंद पड़ चुका है.
वे अपने कानों से ऊंचा ही सुना करते हैं. उन्होंने अपनी आंखें मूंद रखी हैं
कि कहीं वे अपनी आंखों से देखने न लगें,
कानों से सुनने न लगें तथा
अपने हृदय से समझने न लगें और मेरी ओर फिर जाएं कि मैं उन्हें स्वस्थ कर दूं.’
Ouvir e obedecer
Não basta ouvir — é preciso praticar. Quem ouve a Palavra e a pratica é como o homem sábio que edificou sobre a rocha.
वचन की शिक्षा पर चलनेवाले बनो, न कि सिर्फ सुननेवाले, जो स्वयं को धोखे में रखते हैं
वचन की शिक्षा पर चलनेवाले बनो, न कि सिर्फ सुननेवाले, जो स्वयं को धोखे में रखते हैं
प्रिय भाई बहनो, यह ध्यान रहे कि तुम सुनने में तत्पर, बोलने में धीर तथा क्रोध में धीमे हो,
प्रिय भाई बहनो, यह ध्यान रहे कि तुम सुनने में तत्पर, बोलने में धीर तथा क्रोध में धीमे हो, क्योंकि मनुष्य के क्रोध के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता नहीं मिल सकती.
"इसलिये हर एक की तुलना, जो मेरी इन शिक्षाओं को सुनकर उनका पालन करता है, उस बुद्धिमान व्यक्ति से की जा सकती है, जिसने अपने भवन का निर्माण चट्टान पर किया.
"इसलिये हर एक की तुलना, जो मेरी इन शिक्षाओं को सुनकर उनका पालन करता है, उस बुद्धिमान व्यक्ति से की जा सकती है, जिसने अपने भवन का निर्माण चट्टान पर किया. आंधी उठी, वर्षा हुई, बाढ़ आई और उस भवन पर थपेड़े पड़े, फिर भी वह भवन स्थिर खड़ा रहा क्योंकि उसकी नींव चट्टान पर थी. इसके विपरीत हर एक जो, मेरी इन शिक्षाओं को सुनता तो है किंतु उनका पालन नहीं करता, वह उस निर्बुद्धि के समान होगा जिसने अपने भवन का निर्माण रेत पर किया. आंधी उठी, वर्षा हुई, बाढ़ आई, उस भवन पर थपेड़े पड़े और वह धराशायी हो गया—भयावह था उसका विनाश!"
येशु ने उसे उत्तर दिया, "मनुष्य का जीवन सिर्फ भोजन पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के मुख से निकले हुए हर एक शब्द पर भी निर्भर है."
किंतु प्रभु येशु ने कहा, "परंतु धन्य वे हैं, जो परमेश्वर के वचन को सुनकर उसका पालन करते हैं."
किंतु प्रभु येशु ने कहा, "परंतु धन्य वे हैं, जो परमेश्वर के वचन को सुनकर उसका पालन करते हैं."
इन्हीं विषयों को तुमने मुझसे सीखा; प्राप्त किया और मुझसे सुना व मुझमें देखा है; इन्हीं का स्वभाव किया करो और शांति के स्रोत परमेश्वर तुम्हारे साथ होंगे.
Deus ouve nossas orações
O Senhor ouve os que clamam a Ele de coração sincero. Ele inclina os ouvidos para as nossas súplicas e responde com fidelidade.
मुझे याहवेह से प्रेम है, क्योंकि उन्होंने मेरी पुकार सुन ली;
उन्होंने मेरी प्रार्थना सुन ली.
इसलिये कि उन्होंने मेरी पुकार सुन ली,
मैं आजीवन उन्हें ही पुकारता रहूंगा.
अपनी वेदना में मैंने याहवेह की दोहाई दी;
मैंने अपने ही परमेश्वर को पुकारा.
अपने मंदिर में उन्होंने मेरी आवाज सुन ली,
उनके कानों में मेरा रोना जा पड़ा.
क्योंकि याहवेह की दृष्टि धर्मियों पर
तथा उनके कान उनकी विनती पर लगे रहते हैं,
याहवेह, आप प्रातःकाल मेरी वाणी सुनेंगे;
सूर्योदय के समय मैं आपको बलि अर्पित करूंगा
और आपके प्रत्युत्तर की प्रतीक्षा करूंगा.
मुझमें हर्षोल्लास एवं आनंद का संचार कीजिए;
कि मेरी हड्डियां जिन्हें आपने कुचल दी हैं, मगन हो उठें.
मैंने आप पर ही भरोसा किया है,
तब अरुणोदय मेरे लिए आपके करुणा-प्रेम का संदेश लेकर आए.
मुझे मेरे लिए निर्धारित मार्ग पर चलना है वह बताइए,
क्योंकि मेरे प्राणों की पुकार आपके ही ओर लगी है.
परमेश्वर के विषय में हमारा विश्वास यह है: जब हम उनकी इच्छा के अनुसार कोई विनती करते हैं, वह उसे सुनते हैं.
जब हम यह जानते हैं कि वह हमारी हर एक विनती को सुनते हैं, तब हम यह भी जानते हैं कि उनसे की गई हमारी विनती पूरी हो चुकी है.
उस समय तुम मेरी ओर उन्मुख होकर मुझे पुकारोगे, मुझसे बिनती करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा.
‘मुझसे प्रतिवेदन करो तो मैं तुम्हें प्रत्युत्तर दूंगा और मैं तुम पर विलक्षण तथा रहस्यमय बात, जो अब तक तुम्हारे लिए अदृश्य हैं, उन्हें प्रकाशित करूंगा.’
याहवेह का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सकें,
न ही वह बहरे हो चुके कि सुन न सकें.
Ouvir a voz de Deus
Jesus disse: 'As minhas ovelhas ouvem a minha voz.' Deus fala através da Palavra, do Espírito e das circunstâncias — cabe a nós ouvir.
मेरी भेड़ें मेरी आवाज सुनती हैं. मैं उन्हें जानता हूं और वे मेरे पीछे-पीछे चलती हैं.
"मैं तुम पर यह अटल सच्चाई प्रकट कर रहा हूं: जो मेरा वचन सुनता और मेरे भेजनेवाले में विश्वास करता है, अनंत काल का जीवन उसी का है; उसे दोषी नहीं ठहराया जाता, परंतु वह मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका है. मैं तुम पर यह अटल सच्चाई प्रकट कर रहा हूं: वह समय आ रहा है परंतु आ ही गया है, जब सारे मृतक परमेश्वर के पुत्र की आवाज सुनेंगे और हर एक सुननेवाला जीवन प्राप्त करेगा.
सुनो! मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता रहा हूं. यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, मैं उसके घर में प्रवेश करूंगा तथा मैं उसके साथ और वह मेरे साथ भोजन करेगा.
सुनो! मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता रहा हूं. यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, मैं उसके घर में प्रवेश करूंगा तथा मैं उसके साथ और वह मेरे साथ भोजन करेगा.
अनुगमन तुम याहवेह अपने परमेश्वर का करोगे और उन्हीं पर तुम्हारी श्रद्धा और भय बनाए रखोगे, तुम उनके आदेशों का पालन करोगे, उनका स्वर सुनोगे, उन्हीं की वंदना करोगे और उन्हीं से सम्बद्ध रहोगे.
परमेश्वर, जो तुम्हें अपना आत्मा प्रदान करते तथा तुम्हारे बीच चमत्कार करते हैं, क्या यह वह व्यवस्था का पालन करने के द्वारा करते हैं या विश्वास के साथ सुनने के द्वारा?
Sabedoria no ouvir
Seja pronto para ouvir e tardio para falar. A sabedoria começa com a disposição de ouvir instrução e aceitar correção.
यदि कोई ठीक से सुने बिना ही उत्तर देने लगे,
तो यह मूर्खता और लज्जा की स्थिति होती है.
जो कोई शिक्षा को ध्यानपूर्वक सुनता है,
उत्तम प्रतिफल प्राप्त करता है और धन्य होता है वह, जिसने याहवेह पर भरोसा रखा है.
मेरे पुत्र, अपने पिता के आदेश पालन करते रहना,
अपनी माता की शिक्षा का परित्याग न करना.
जो कोई सावधानीपूर्वक शिक्षा का चालचलन करता है,
वह जीवन मार्ग पर चल रहा होता है, किंतु जो ताड़ना की अवमानना करता है, अन्यों को भटका देता है.
जो व्यक्ति नियम-व्यवस्था का परित्याग करता है,
उसकी प्रार्थना भी परमेश्वर के लिए घृणित हो जाती है.
एक बुद्धिमान की फटकार सुनना
मूर्खों के गीतों को सुनने से बेहतर है.
इतना थकाने वाला है सभी कुछ,
कि मनुष्य के लिए इसका वर्णन संभव नहीं.
आंखें देखने से तृप्त नहीं होतीं,
और न कान सुनने से संतुष्ट.
" ‘इतना होने पर भी यदि तुम अपना स्वभाव मेरे विरुद्ध ही रखोगे और मेरी आज्ञा न मानोगे, तो मैं तुम्हारे पापों के अनुसार तुम पर महामारी में सात गुणा वृद्धि कर दूंगा.
यदि तुम नहीं सुनते हो, और यदि तुम मेरे नाम का आदर करने का निश्चय नहीं करते हो," सर्वशक्तिमान याहवेह का कहना है, "तो मैं तुमको एक शाप दूंगा, और मैं तुम्हारी आशीषों को श्रापित करूंगा. हां, मैं उन्हें पहले ही शापित कर चुका हूं, क्योंकि तुमने मेरा आदर न करने का निश्चय किया है.
परंतु जब मैं तुमसे बातें करूंगा, तो मैं तुम्हारे मुंह को खोल दूंगा और तुम उनसे कहोगे, ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है.’ जो कोई सुनना चाहे, वह सुने, और जो कोई सुनना न चाहे, वह न सुने; क्योंकि वे एक विद्रोही लोग हैं.
परम प्रभु यह घोषणा करते हैं, "ऐसे दिन आ रहे हैं,
जब मैं संपूर्ण देश में अकाल भेजूंगा—
अन्न-जल का अकाल नहीं
पर याहवेह के वचन के सुनने का अकाल.
लगभग आधी रात के समय पौलॉस और सीलास प्रार्थना कर रहे थे तथा परमेश्वर की स्तुति में भजन गा रहे थे. उनके साथी कैदी उनकी सुन रहे थे.
तब यहोशू ने इस्राएलियों से कहा, "यहां आकर याहवेह, अपने परमेश्वर का संदेश सुनो.
वे शब्द, जो तुमने अंधकार में कहे हैं, प्रकाश में सुने जाएंगे, जो कुछ तुमने भीतरी कमरे में कानों में कहा है, वह छत से प्रचार किया जाएगा.
"यदि कोई सहविश्वासी तुम्हारे विरुद्ध कोई अपराध करे तो जाकर उस पर उसका दोष प्रकट कर दो, किंतु यह मात्र तुम दोनों के मध्य ही हो. यदि वह तुम्हारी सुन ले तो तुमने उसे पुनः प्राप्त कर लिया.
"यदि कोई सहविश्वासी तुम्हारे विरुद्ध कोई अपराध करे तो जाकर उस पर उसका दोष प्रकट कर दो, किंतु यह मात्र तुम दोनों के मध्य ही हो. यदि वह तुम्हारी सुन ले तो तुमने उसे पुनः प्राप्त कर लिया. किंतु यदि वह तुम्हारी न माने तब अपने साथ एक या दो को उसके पास ले जाओ कि एक बात की पुष्टि के लिए दो या तीन गवाहों की ज़रूरत होती है. यदि वह उनका भी इनकार करे तब कलीसिया पर यह सच प्रकट कर दिया जाए. यदि वह कलीसिया की भी न माने तब उसे गैर-यहूदी और समाज से बहिष्कृत व्यक्ति समझो.
येथ्रो ने जब सुना कि याहवेह ने कैसे इस्राएलियों को संभाला. वे बहुत खुश हुए, कि याहवेह ने इस्राएलियों पर अपनी भलाई की और मिस्रियों से छुड़ाया.
मृत्यु की लहरों में घिर चुका था;
मुझ पर विध्वंस की तेज धारा का वार हो रहा था.
अधोलोक के तंतुओं ने मुझे उलझा लिया था;
मैं मृत्यु के जाल के आमने-सामने आ गया था.
"अपनी वेदना में मैंने याहवेह की दोहाई दी;
मैंने अपने ही परमेश्वर को पुकारा.
अपने मंदिर में उन्होंने मेरी आवाज सुन ली,
उनके कानों में मेरा रोना जा पड़ा.